शांतिपूर्ण प्रदर्शन सांविधानिक अधिकार, केवल आशंका पर रोकना अनुचित : कोर्ट
श्रमिक आंदोलन मामले में आकृति को पांच लाख मुआवजा देने का आदेश, डीएम और जिम्मेदार अधिकारियों के वेतन से होगी वसूली
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अधिकारों और मांगों के समर्थन में बिना हथियार शांतिपूर्ण ढंग से सार्वजनिक स्थान पर एकत्र होकर प्रदर्शन करना नागरिकों का सांविधानिक अधिकार है। प्रदर्शन से कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है, इस आशंका के आधार पर लोगों को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने से नहीं रोका जा सकता।
कोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण और बिना हथियार के होने वाले प्रदर्शन को राज्य की ओर से केवल अनुमान या आशंका के आधार पर प्रतिबंधित करना संविधान में मिले सामूहिक अभिव्यक्ति के अधिकार को प्रभावित करेगा। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने गौतमबुद्ध नगर की छात्रा आकृति चौधरी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत की गई कार्रवाई रद्द कर दी।
गौतमबुद्ध नगर में कम वेतन मिलने, लगातार 12 घंटे काम करने और 10-15,000 के बीच वेतन मिलने से नाराज श्रमिकों ने आंदोलन किया था। इसमें श्रमिकों पर तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं को अंजाम देने का आरोप लगा था। घटना में याचिकाकर्ता को उकसाने वाला माना गया था। साथ ही विभिन्न आरोपों में प्राथमिकी दर्ज कर एनएसए के तहत भी कार्रवाई करते हुए आकृति को गिरफ्तार कर लिया गया था। याची ने गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी।
कोर्ट ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए आकृति को पांच लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। कहा है कि यह राशि डीएम व मामले में जिम्मेदार अन्य अधिकारियों के वेतन से वसूली जाए। —
ऐसा कोई संदेश या वीडियो नहीं, जिससे साबित हो कि हिंसा के लिए उकसाया : कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई संदेश या वीडियो नहीं है, जिससे साबित हो कि आकृति ने लोगों को हिंसा, आगजनी या सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए उकसाया था। कोर्ट ने एनएसए के तहत आकृति की हिरासत को अनुच्छेद-21 का उल्लंघन माना और तत्काल रिहाई का आदेश दिया, बशर्ते वह किसी अन्य मामले में वांछित न हों। कोर्ट ने डीएम के हिरासत आदेश को बिना पर्याप्त सामग्री व बगैर उचित विचार वाला माना।
अधिकारियों का तानाशाही रवैया राज्य को निरंकुश व्यवस्था में बदल देगा : हाईकोर्ट ने डीएम और संबंधित पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली की कड़े शब्दों में निंदा की है। कोर्ट ने कहा कि बिना किसी ठोस सबूत के एक छात्रा पर रासुका लगाकर संविधान के प्रति ली गई शपथ का उल्लंघन किया गया है। पीठ ने चेतावनी दी कि अधिकारियों का ऐसा तानाशाही और असंवेदनशील रवैया राज्य को एक निरंकुश व्यवस्था में बदल देगा। इस मनमाने फैसले के लिए कोर्ट ने अधिकारियों की सर्विस बुक में प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज करने का आदेश दिया है।
Basic Shiksha Khabar | PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News | Primarykamaster | Updatemarts | Primary Ka Master | Basic Shiksha News | Uptet News | primarykamaster | SHIKSHAMITRA




