लखनऊ। शिक्षा विभाग मोबाइल के लती बच्चों को उससे दूर रखने के लिए उन्हें किताबों से जोड़ेगा। उन्हें किताबें पढ़ने को प्रेरित किया जाएगा। विद्यार्थियों द्वारा पढ़ी गईं पुस्तकों का सारांश प्रस्तुति प्रार्थना सभा में कराई जाएगी। जिससे उनकी अभिव्यक्ति कौशल का विकास होगा। विद्यालयों के शैक्षिक भ्रमण कार्यक्रमों में विद्यार्थियों को जिला पुस्तकालय व अन्य किसी पुस्तकालय का भ्रमण कराया जाएगा। उन्हें पुस्तकालय की संरचना, सेवाओं एवं उपयोगिता के संबंध में जानकारी दी जाएगी। प्रत्येक स्कूल की एक मैगजीन तैयार कराई जाएगी और उसका संपादन विद्यार्थियों द्वारा किया जाएगा, जिससे उनकी लेखन क्षमता व सृजनशीलता में वृद्धि होगी।
विद्यालय व पुस्तकालयों के शिक्षक और कर्मचारी स्वयं भी किताबें पढ़ेंगे और छात्रों को उसके बारे में जानकारी देंगे। हर महीने सर्वाधिक किताबें पढ़ने और प्रार्थना सभा में उसकी चर्चा करने वाले छात्र को विद्यालय की ओर से प्रशंसा पत्र दिया जाएगा। सभी स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वह सांस्कृतिक कार्यक्रमों व विभिन्न प्रतियोगिता में विजेता छात्रों को फूलों का गुलदस्ता (बुके) देने की बजाए बुक दें। ट्राफी या स्मृति चिह्न की जगह उन्हें कोई अच्छी पुस्तक दी जाएगी तो वह उसका ढंग से पठन-पाठन करेंगे। उनकी दिलचस्पी पुस्तकों के प्रति बढ़ेगी।
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