8th Pay Commission: कम से कम 68000 रुपये सैलरी और पुरानी पेंशन! चेन्नई मीटिंग में छाए रहे ये मुद्दे
8वें पे कमीशन की चेन्नई मीटिंग समाप्त हो गई है। इस मीटिंग का बड़ा मुद्दा पुरानी पेंशन रहा है। कर्मचारी संगठनों की तरफ से पुरानी पेंशन की व्यवस्था को फिर से बहाल करने की मांग की जा रही है। आइए जानते हैं कि पेंशनर्स की तरफ से 5 बड़ी मांगे कौन-कौन सी हैं।
1-पुरानी पेंशन की बहाली
कर्मचारियों से जुड़े संगठन लगातार पुरानी पेंशन को बहाल करने की मांग कर रहे हैं। चेन्नई मीटिंग में भी यह मुद्दा लोगों के सामने उठा। कर्मचारियों से जुड़े संगठनों की लम्बे समय से पेंशन से जुड़ी मांग हो रही है।
2- पेंशन बढ़ाने की चर्चा
रिटायर हो चुके कर्मचारी अपने और अपने परिवार के लिए और पेंशन की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा पेंशन महंगाई और परिवार के जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त नहीं है।
3- रिकवरी को लेकर कोई फिक्स फॉर्मूला
कई बार पेंशनर्स एक मोटी रकम अपनी जरूरत के हिसाब से निकाल लेते हैं। इसको लेकर अबतक कोई फिक्स फॉर्मूला तय नहीं है। जिसकी वजह से कई बार पेंशनर्स के दिमाग में कंफ्यूजन हो जाता है। इसे भी सुधारने और बेहतर करने की मांग की जा रही है।
4- MACP में भी सुधार की मांग
मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेसन स्कीम को भी अपडेट करने की मांग की जा रही है। पोस्टल कर्मचारी बेहतर करियर प्रोग्रेस की डिमांड कर रहे हैं। इसके अलावा पे स्केल को सुधारने की मांग हो रही है।
5- अच्छा भत्ता, छुट्टी और सामाजिक सुरक्षा
8वें वित्त आयोग के साथ मीटिंग में बेहतर भत्ता, छुट्टी और मजबूत सामाजिक सुरक्षा की भी मांग हुई है। यह कर्मचारियों के साथ-साथ पेंशनर्स के लिए भी मांग की गई है।
68000 रुपये मिनिमम सैलरी की मांग (8th Pay Commission basic Pay)
सिर्फ पेंशन ही नहीं, बेसिक पे को लेकर भी बड़ी डिमांड की गई है। इस बैठक में कर्मचारियों को कम से कम 68000 रुपये की सैलरी की डिमांड की गई है। बता दें, 8वें पे कमीशन का गठन पिछले साल नवंबर में किया गया था। इस आयोग के पास 18 महीने का समय है। जिसमें 10 महीने का समय बीत गया है। अब सवाल है कि आयोग ने अबतक की मीटिंग के बाद क्या कुछ तय किया है।
पे कमीशन की तरफ से फिटमेंट फैक्टर्स, फैमिली यूनिट आदि को लेकर अबतक कोई भी आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। ना ही आयोग ने सरकार को कोई रिपोर्ट दी है। पे कमीशन के पास अगले साल मई तक का समय है। अब देखना है कि फिटमेंट फैक्टर कितना रखा जाता है।
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