पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई आज, पीएस पटवालिया और वी गिरी रखेंगे पक्ष
लखनऊ। देश-प्रदेश के शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के मामले में 13 मई को सुप्रीम कोर्ट में शिक्षकों की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई होगी। शिक्षक इसमें कोई चूक नहीं करना चाहते हैं। इसलिए देश के दो नामी वकील किए हैं, जो सुप्रीम कोर्ट में उनका पक्ष रखेंगे ताकि मामले में उनको राहत मिल सके।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने एक सितंबर 2025 के आदेश दिया था कि शिक्षण सेवा में बने रहने व पदोन्नति के लिए टीईटी अनिवार्य है। साथ ही कहा था कि जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच साल से कम है, उन्हें टीईटी के बिना सेवा जारी रखने की अनुमति दी जाएगी। इसके बाद से देश भर के शिक्षक आंदोलन कर रहे हैं। वे वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से राहत देने की मांग कर रहे हैं। कई राज्यों के शिक्षक संगठन टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) की ओर से राहत की मांग को लेकर दिल्ली में रैली भी की गई है।
इतना ही नहीं, शिक्षक सांसद जगदंबिका पाल, जितिन प्रसाद और भाजपा के यूपी अध्यक्ष पंकज चौधरी आदि से भी मिल चुके हैं।
टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने बताया कि इस मामले में पक्ष रखने के लिए दो वरिष्ठ अधिवक्ता किए हैं। इनमें केंद्र सरकार के पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल व हरियाणा-पंजाब हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश पीएस पटवालिया और केरल हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश वी गिरी शामिल हैं। दोनों अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट से राहत देने की अपील करेंगे। वहीं, कई अन्य शिक्षक संगठनों ने भी इस मामले में अपने अधिवक्ता शिक्षकों को पक्ष रखने के लिए खड़े किए हैं।
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