लखनऊ। वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को प्रबंधतंत्र ही अपने स्रोत से मानदेय व अन्य सुविधाएं देगा। फिलहाल सरकार की तरफ से पहले से चल रही व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है। यह जानकारी माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने विधान परिषद में शिक्षक दल के एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी के सवाल के जवाब में दिया।
नियम 105 के तहत ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने कहा कि 1987 में दो साल के लिए यह व्यवस्था लागू की गई थी, लेकिन 38 साल बाद भी यह व्यवस्था चल रही है। पूरी योग्यता रखने के बाद भी शिक्षकों
विधान परिषद में सवाल पूछने पर माध्यमिक शिक्षा मंत्री ने दी जानकारी
को नाममात्र का मानदेय मिलता है। सेवा नियमावली भी नहीं है। सरकार इनको कम से कम 25-30 हजार मानदेय दे और सेवा नियमावली बनाए ताकि इनका परिवार सही से चल सके। नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव व शिक्षक दल के एमएलसी राजबहादुर चंदेल ने भी इसका समर्थन किया।
इसके जवाब में मंत्री ने कहा कि नियमों के अनुसार अंशकालिक शिक्षकों का मानदेय व अन्य व्यय प्रबंध तंत्र खुद ही वहन करेंगे। प्रबंधन को शासनादेश के अनुसार न्यूनतम निर्धारित मानदेय देना होगा।
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