अमेठी सिटी। परिषदीय विद्यालयों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत बच्चों को औपचारिक शिक्षा से पहले अक्षर और संख्या की पहचान कराई जाएगी। इस उद्देश्य से इन केंद्रों में बाल वाटिका (प्री-नर्सरी) की व्यवस्था शुरू की जा रही है। पहले चरण में को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों को बाल वाटिका के रूप में विकसित करने का निर्देश दिया गया है। इन केंद्रों में तीन से छह वर्ष तक की आयु के बच्चों का नामांकन होता है।
वर्तमान में जिले के सभी विकासखंडों में कुल 1949 आंगनबाड़ी केंद्र क्रियाशील हैं जिनमें से 1525 केंद्र को-लोकेटेड स्थिति में हैं। इन केंद्रों में करीब 60 हजार बच्चों का नामांकन है। पंजीकृत पांच से छह साल के बच्चों को प्राथमिक शिक्षा के लिए तैयार करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बाल वाटिका की अवधारणा के तहत बच्चों में ऐसी प्रारंभिक समझ विकसित की जाएगी जिससे वे कक्षा एक में पहुंचने से पहले बुनियादी शैक्षिक दक्षता प्राप्त कर सकें। प्रत्येक चयनित केंद्र में एक कक्षा कक्ष, किचन, शौचालय, मल्टीपल हैंडवाश यूनिट, बच्चों के अनुकूल फर्नीचर और शैक्षिक सामग्री उपलब्ध कराई गई है।
यहां बच्चों के साथ संवादात्मक और खेल आधारित पद्धति से भाषा तथा गणना का परिचय कराया जाएगा। जिला कार्यक्रम अधिकारी संतोष कुमार श्रीवास्तव के अनुसार इस शैक्षिक सत्र से बाल वाटिकाओं में पंजीकृत बच्चों को नियमित कक्षाओं के माध्यम से बुनियादी शिक्षा दी जाएगी.
बुनियादी समझ के साथ कक्षा एक में पहुंचेंगे बच्चे
8 बाल वाटिका के माध्यम से बच्चों को भाषा और गणना का प्रारंभिक ज्ञान दिया जाएगा। यह प्रयास बच्चों की मानसिकता को प्राथमिक शिक्षा के लिए तैयार करेगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और शिक्षकों के समन्वय से नियमित कक्षाएं संचालित कराई जाएंगी।
– संजय कुमार तिवारी, बीएसए
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