जिनको छूट देनी थी, दे दी…बाकी शिक्षकों को देनी होगी परीक्षा, TET मामले में सुप्रीम कोर्ट – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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भोपाल. मध्य प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने बुधवार को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के लंबित सभी मामलों में एक साथ सुनवाई की. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा के नियमों में जो भी छूट दी जानी थी, वह पहले ही दी जा चुकी है. अब इसमें कोई और छूट की गुंजाइश नहीं है. ऐसे में अब टीईटी पास किए बिना कोई भी टीचर नहीं रह सकता है. जिन टीचर्स की नौकरी के पांच साल बचे हैं, उन्हें यह परीक्षा नहीं देनी होगी. बाकी शिक्षकों को यह परीक्षा जरूर देनी होगी.

टीईटी मामले में मध्य प्रदेश के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र सरकार की ओर से भी रिव्यू पिटीशन फाइल की गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने इन चारों राज्यों के शिक्षक संगठनों की ओर से दायर याचिकाओं को भी जोड़ते हुए एक साथ मामले की सुनवाई की. सभी पिटीशन में साल 1998 से 2009 के बीच नियुक्त किए गए शिक्षकों को परीक्षा से छूट देने की मांग की गई.

श्रेणीवार सूची पेश करने का आदेश

मध्य प्रदेश के शिक्षकों की ओर से जगदीश यादव ने याचिका दायर की है. उनके वकील पृथ्वीराज सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने एमपी को लेकर निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई से पहले कोर्ट में सभी शिक्षकों की श्रेणीवार सूची पेश की जाए. इसमें साफ हो कि कितने शिक्षक जनरल कैटेगरी, कितने ओबीसी, कितने एससी और कितने एसटी वर्ग के हैं.

परीक्षा नहीं देने पर सेवा समाप्त

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल एक सितंबर को साल 1998 से 2009 के बीच नियुक्त हुए शिक्षकों की शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर कहा था कि 1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षक जो मेरिट के आधार पर भर्ती हुए थे, उन्हें यह परीक्षा देनी होगी. एग्जाम नहीं देने पर उनकी सेवा समाप्त की जाएगी. इसके बाद मध्य प्रदेश सरकार और विभिन्न शिक्षक संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर परीक्षा से छूट की मांग की थी. उन्होंने याचिका में कहा था कि पुराने शिक्षकों को उनके अनुभव के आधार पर छूट दी जाए.

क्या है शिक्षक पात्रता परीक्षा?

शिक्षक पात्रता परीक्षा एक अनिवार्य योग्यता है, जिसे NCTE ने साल 2010 में लागू किया था. यह सुनिश्चित करता है कि कक्षा एक से 8 तक पढ़ाने वाले टीचर्स में न्यूनतम शैक्षणिक स्तर और कौशल मौजूद है. मध्य प्रदेश में करीब डेढ़ लाख शिक्षकों को फिर से छात्र बनकर यह परीक्षा देनी होगी. टीईटी परीक्षा में दो पेपर होते हैं, जिनमें से एक में पहली से पांचवीं कक्षा और दूसरे में पांचवीं से आठवीं कक्षा तक के लिए परीक्षा होती है.

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