लखनऊ। प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सरप्लस शिक्षकों के समायोजन (एडजस्टमेंट) की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग का लक्ष्य 30 जून तक पूरी प्रक्रिया समाप्त कर नए शैक्षिक सत्र से पहले विद्यालयों में शिक्षक-छात्र अनुपात को संतुलित करना है, ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो।
विभाग के अनुसार जिन विद्यालयों में आवश्यकता से अधिक शिक्षक कार्यरत हैं, वहां से उन्हें ऐसे स्कूलों में भेजा जाएगा जहां शिक्षकों की कमी है। कई जिलों ने सरप्लस शिक्षकों की सूची जारी कर दी है और रिक्त पदों वाले विद्यालयों में उनकी तैनाती की तैयारी शुरू हो गई है।
30 जून तक कार्यभार ग्रहण करना होगा
माध्यमिक शिक्षा विभाग ने निर्देश दिया है कि समायोजित किए गए शिक्षकों को 30 जून तक नए विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करना होगा। इसके लिए जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालयों के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन और प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
कई जिलों में अधिक संख्या में सरप्लस शिक्षक
जानकारी के अनुसार प्रतापगढ़, झांसी, सोनभद्र, संभल, मैनपुरी, गोंडा, महोबा, कानपुर नगर, जालौन, ललितपुर, आगरा, एटा, महाराजगंज, गाजीपुर और सहारनपुर सहित कई जिलों में सरप्लस शिक्षकों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक बताई गई है।
शिक्षण कार्य के मानक भी किए गए स्पष्ट
राजकीय इंटर कॉलेजों में विज्ञान, वाणिज्य और अन्य विषयों के प्रवक्ताओं के लिए प्रतिदिन कम से कम पांच पीरियड पढ़ाना शिक्षण कार्य माना जाएगा। यदि किसी विषय में इंटरमीडिएट स्तर पर मानक के अनुसार छात्र संख्या उपलब्ध नहीं है, तो संबंधित शिक्षक का शिक्षण कार्य कक्षा 6 से 10 तक की कक्षाओं में भी माना जाएगा।
शिक्षकों ने उठाए कुछ सवाल
कुछ जिलों में अभी तक सरप्लस शिक्षकों की सूची जारी नहीं हुई है। वहीं कुछ शिक्षकों का कहना है कि केवल छात्र संख्या के आधार पर उन्हें सरप्लस घोषित किया गया है। कई शिक्षकों ने ऑनलाइन तबादला प्रक्रिया और विषयवार जानकारी उपलब्ध न होने को लेकर भी चिंता जताई है।
विभाग का कहना है कि समायोजन प्रक्रिया का उद्देश्य विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराना और नए सत्र में शैक्षणिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना है।
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