स्कूल के दिनों में बच्चों को घुमा रहे माता-पिता, महंगे पर्यटन सीजन से बचने के लिए परिवारों का नया प्लान
लंदन, एजेंसी। अपने बढ़ते खर्च को कम करने के लिए कई माता-पिता बच्चों की स्कूल छुट्टियों के बजाय स्कूल के दिनों में ही यात्रा कर रहे हैं।
इस संबंध में ब्रिटेन की कई पर्यटन से जुड़ी एजेंसियों ने बड़ा विश्लेषण किया। जानकारों का मानना है कि स्कूल के दिनों और छुट्टियों के दौरान कीमतों में जमीन-आसमान का अंतर होता है।
अगर कोई परिवार स्कूल की छुट्टियों के बजाय सिर्फ दो से तीन हफ्ते आगे-पीछे अपनी यात्रा प्लान करता है तो फ्लाइट और होटलों के दाम आधे हो जाते हैं। उनका मानना है कि यह फैसला सिर्फ पैसों की बचत से नहीं जुड़ा है, बल्कि बच्चों के मानसिक विकास के लिए भी फायदेमंद है। ऑफ-सीजन में पर्यटन स्थलों पर भीड़-भाड़ बेहद कम होती है, जिससे बच्चे ज्यादा शांति और गहराई से नई चीजें सीख पाते हैं। यात्रा के दौरान बच्चों ने न केवल अलग-अलग देशों की अनूठी संस्कृति और खान-पान को करीब से देखा, बल्कि समुद्र के किनारे जाकर समुद्री जीवों, स्नॉर्कलिंग और इतिहास के बारे में भी जाना।
बच्चों के लिए खोजा घूमने का नया तरीका
पर्यटन से जुड़ी विभिन्न रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 85 से 87 फीसदी परिवार गर्मियों की छुट्टियों के दौरान बच्चों के साथ घूमने की योजना बनाते हैं। पीक सीजन में आसमान छूती कीमतों के कारण बच्चों वाले करीब 95 फीसदी माता-पिता के लिए समर वेकेशन को बजट में प्लान करना सबसे पहली प्राथमिकता बन गया है। इस दौरान जहां 60 फीसदी लोग महंगे अंतरराष्ट्रीय पैकेज छोड़कर देश के भीतर ही ठंडे पहाड़ी इलाकों का रुख कर रहे हैं, वहीं बाकी भारी खर्च से बचने के लिए पैतृक गांव जा रहे हैं।
खर्च की समस्या से निपटने के लिए जर्मनी ने एक स्मार्ट तरीका अपनाया है। वहां अलग-अलग राज्यों या इलाकों में स्कूल की छुट्टियां अलग-अलग तारीखों पर होती हैं। इससे पर्यटन स्थलों पर एक साथ भीड़ नहीं उमड़ती और कंपनियां मनमाने दाम नहीं बढ़ा पातीं।
पीक सीजन में फ्लाइट वहोटल के दाम दोगुने हो जाते हैं, जिससे बचने के लिए माता-पिता ऑफ-सीजन में बजट-फ्रेंडली डील का फायदा उठाते हैं। यूरोपीय देशों की तरह भारत में स्कूल बंक करने पर माता-पिता पर आर्थिक जुर्माना नहीं लगता, यह फैसला लेना आसान हो जाता है।
लंदन, एजेंसी। अपने बढ़ते खर्च को कम करने के लिए कई माता-पिता बच्चों की स्कूल छुट्टियों के बजाय स्कूल के दिनों में ही यात्रा कर रहे हैं।
इस संबंध में ब्रिटेन की कई पर्यटन से जुड़ी एजेंसियों ने बड़ा विश्लेषण किया। जानकारों का मानना है कि स्कूल के दिनों और छुट्टियों के दौरान कीमतों में जमीन-आसमान का अंतर होता है।
अगर कोई परिवार स्कूल की छुट्टियों के बजाय सिर्फ दो से तीन हफ्ते आगे-पीछे अपनी यात्रा प्लान करता है तो फ्लाइट और होटलों के दाम आधे हो जाते हैं। उनका मानना है कि यह फैसला सिर्फ पैसों की बचत से नहीं जुड़ा है, बल्कि बच्चों के मानसिक विकास के लिए भी फायदेमंद है। ऑफ-सीजन में पर्यटन स्थलों पर भीड़-भाड़ बेहद कम होती है, जिससे बच्चे ज्यादा शांति और गहराई से नई चीजें सीख पाते हैं। यात्रा के दौरान बच्चों ने न केवल अलग-अलग देशों की अनूठी संस्कृति और खान-पान को करीब से देखा, बल्कि समुद्र के किनारे जाकर समुद्री जीवों, स्नॉर्कलिंग और इतिहास के बारे में भी जाना।
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