बिना विभाग की अनुमति दूसरी शादी करना कदाचार: हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पहली पत्नी के जीवित रहते बिना विभागीय अनुमति दूसरी शादी करने के आरोप में सेवा से बर्खास्त सीआरपीएफ कांस्टेबल प्रभु सिंह को राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि अनुशासित बल के सदस्य द्वारा पहली शादी के रहते दूसरी शादी करना नियमों का उल्लंघन और गंभीर कदाचार है। ऐसी स्थिति में सेवा से बर्खास्तगी का आदेश न तो अत्यधिक है और न ही नियमों के विपरीत।
न्यायमूर्ति अनिल कुमार गुप्ता ने प्रभु सिंह की ओर से दाखिल याचिका खारिज करते हुए यह आदेश दिया। याचिका में 8 जुलाई 2011 को बर्खास्तगी के आदेश तथा अपीलीय और पुनरीक्षण अधिकारियों के 4 जून 2013 और 13 दिसंबर 2013 के आदेशों को चुनौती दी गई थी।
मामले के अनुसार प्रभु सिंह ने 1976 में उर्मिला देवी से हिंदू रीति-रिवाज से शादी की थी। वर्ष 1988 में वह सीआरपीएफ में कांस्टेबल नियुक्त हुआ। वर्ष 1989 में उसकी पहली पत्नी बच्चों के साथ घर छोड़कर चली गई। इसके बाद वर्ष 1992 में प्रभु सिंह ने बिना तलाक लिए प्रतिमा देवी से दूसरी शादी कर ली। उसने विभाग से दूसरी शादी की अनुमति भी नहीं ली और इसकी सूचना भी नहीं दी। बाद में सेवा अभिलेख में प्रतिमा देवी को अपनी पत्नी के रूप में नामित कर दिया।
विभागीय जांच में आरोप सिद्ध होने के बाद उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। प्रभु सिंह का तर्क था कि दूसरी शादी का नामांकन के माध्यम से विभाग को पता था और अधिकतम मामूली सजा दी जा सकती थी। हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।
कोर्ट ने कहा कि सीआरपीएफ नियमावली के नियम 15 और केंद्रीय सिविल सेवा आचरण नियमों के नियम 21 के तहत पहली पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी प्रतिबंधित है। हिंदू विवाह अधिनियम के तहत भी बिना तलाक दूसरी शादी वैध नहीं है। कोर्ट ने यह भी माना कि दूसरी पत्नी को सेवा अभिलेख में दर्ज कराते समय उसे दूसरी पत्नी बताने की जानकारी छिपाना जानबूझकर किया गया तथ्य-छिपाव था।
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के यूनियन ऑफ इंडिया बनाम गुलाम मोहम्मद भट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि सीआरपीएफ अधिनियम की धारा 11 के तहत निलंबन या बर्खास्तगी की सजा भी दी जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि सजा में हस्तक्षेप तभी किया जा सकता है, जब वह न्यायालय की अंतरात्मा को झकझोरने वाली या नियमों के तहत पूरी तरह अस्वीकार्य हो। इस मामले में ऐसी कोई स्थिति नहीं है। लिहाजा याचिका खारिज कर दी गई।
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