लखनऊ। उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ ने टीईटी के मसले पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़े आन्दोलन की चेतावनी दी है।
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के आदेश से शिक्षकों की नौकरी पर संकट गहरा गया है। अगले दो वर्ष के भीतर टीईटी देनी होगी अन्यथा नौकरी छोड़नी पड़ सकती है। इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के आह्वान पर 10 सितंबर से शिक्षकों की ओर से डाक से प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को पत्र भेजने का अभियान चल रहा है। अब तक कुल 250453 शिक्षकों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अपनी समस्याएं बताईं हैं।
यह सिलसिला 20 सितंबर तक जारी रहेगा, संगठन का पांच लाख पत्र भेजनें का लक्ष्य है। संगठन की मुख्य मांग 25 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट देने की है। शिक्षकों पर टेट थोपने के फैसले से व्यथित होकर बुंदेलखंड में अब तक दो शिक्षकों द्वारा आत्महत्या करने जैसी घटनाओं पर शिक्षकों में जबरदस्त रोष देखने को मिल रहा है। उन्होंने बताया की शिक्षक 55 साल की आयु में टेट क्या नेट एग्जाम भी क्लियर कर देगा लेकिन नीति निर्धारणकर्ता ये बताएं की कलेक्टर 30 साल बाद यूपीएससी एग्जाम, डॉक्टर 35 साल बाद नीट, तहसीलदार 30 साल बाद पीसीएस एग्जाम या पुलिस के लोगो से 25 साल बाद अपना फिटनेस और एग्जाम क्लियर पुनः कर पाएंगे? ऐसे में क्या यह शिक्षकों के साथ अन्याय नहीं है की 55 वर्ष का शिक्षक अब बच्चों को पढ़ाए या खुद परीक्षा की तैयारी करे! श्री यादव ने बताया कि केंद्र सरकार चाहे तो शिक्षकों को राहत मिल सकती है। उन्होंने बताया कि सरकार अगर सकारात्मक पहल नहीं करती है तो देश के शिक्षक दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा धरना प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।
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