4.26 लाख रुपये का रिकवरी आदेश रद्द, स्टोर कीपर से की जा रही थी वसूली, वापस मिलेगी रकम
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्मचारी को गलत वेतन निर्धारण के कारण हुए अधिक भुगतान की वसूली के मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सेवानिवृत्ति के छह माह बाद कर्मचारी के खिलाफ सरकारी देयता की वसूली का आदेश जारी नहीं किया जा सकता, जब अधिक भुगतान कर्मचारी की गलती या धोखाधड़ी से नहीं हुआ हो। जस्टिस राकेश मोहन पांडेय ने पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त स्टोर कीपर को राहत देते हुए 1,10,923 रुपये और 3,15,988 रुपये की वसूली के आदेश रद्द कर दिए।
छत्तीसगढ़ कोर्ट ने कहा- न कर्मचारी की गलती थी और न ही धोखाधड़ी का मामला, पेंशन के नियम भी वसूली के आड़े।
रफीक मसीह मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का दिया हवाला, कोर्ट ने कहा- स्वीकार्य नहीं।
कोमल प्रसाद राठौर की नियुक्ति 18 नवंबर 1983 को हुई थी और उन्होंने 30 जून 2020 को सेवानिवृत्ति ली। विश्वविद्यालय ने पांच जनवरी 2021 को 1,10,923 रुपये की वसूली का आदेश जारी किया, इसके बाद 23 सितंबर 2021 को 3,15,988 रुपये की दूसरी वसूली भी निर्धारित की गई। कोर्ट ने कहा कि वसूली आदेश सेवानिवृत्ति के छह माह बाद जारी हुए, जो नियम 66 के तहत स्वीकार्य नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट के रफीक मसीह फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों से अधिक भुगतान की वसूली कानूनन स्वीकार्य नहीं है। हाई कोर्ट ने दोनों वसूली आदेशों को निरस्त करते हुए पहले से जमा राशि को तत्काल लौटाने का निर्देश दिया।
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