नई दिल्ली : उच्च शिक्षा
के लिए छात्रों को अब अलग- अलग कालेज व शैक्षणिक संस्थानों के चक्कर नहीं लगाने होंगे, बल्कि उनकी उच्च शिक्षा से जुड़ी सारी पढ़ाई अब उच्चतर शैक्षणिक संस्थानों के एक समूह में ही होगी। इसके लिए राज्यों में उच्चतर शैक्षणिक संस्थानों का एक समूह (क्लस्टर) बनेगा। जिसमें स्नातक, परास्नातक और शोध कराने वाले अलग-अलग विषयों के उच्च शिक्षण संस्थान शामिल होंगे। फिलहाल शिक्षा मंत्रालय ने देश के सभी राज्यों से उच्चतर शैक्षणिक संस्थानों का समूह बनाने को लेकर प्रस्ताव मांगा है।
शिक्षा मंत्रालय ने यह पहल ऐसे समय की है, जब देश में उच्चतर शिक्षा को लेकर भारी बिखराव है। कोई संस्थान सिर्फ स्नातक की पढ़ाई करा रहा है, वह भी सिर्फ कला वर्ग की। तो कोई सिर्फ विज्ञान विषयों और वाणिज्य विषय की पढ़ाई कराता है। वहीं कृषि और इंजीनियरिंग आदि में स्नातक कराने वाले संस्थान भी अलग हैं। इसके अलावा परास्नातक और शोध आदि की पढ़ाई कराने
वाले उच्चतर शिक्षण संस्थान भी अलग-अलग विषयों को लेकर बंटे हुए हैं। ऐसे में छात्रों को स्नातक से शोध तक के लिए कई संस्थानों के चक्कर लगाने होते है। एनईपी में भी उच्चतर शैक्षणिक समूह बनाने की सिफारिश की गई है। इसके साथ ही नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के लागू होने के बाद शिक्षा के क्षेत्र में जिस तरह से क्रेडिट फ्रेमवर्क का ढांचा तैयार हो रहा है, जिसमें छात्रों को जिस तरह से अपने क्रेडिट के साथ बीच में कभी पढ़ाई को छोड़ने व शुरू करने की आजादी दी गई है, उसमें यह समूह और ज्यादा उपयोगी होंगे।
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