उत्तर प्रदेश के चित्रकूट से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। स्कूलों में लापरवाही और नियमों की अनदेखी अब भारी पड़ने लगी है। ताजा latest update के मुताबिक, पांच प्रधानाध्यापक और दो शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद बेसिक शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई है।
निरीक्षण में खुली कई परतें
मामला तब सामने आया जब बीएसए बीके शर्मा ने 9 और 10 अप्रैल को करीब 12 सरकारी स्कूलों का निरीक्षण किया। पहली नजर में सब सामान्य दिखा, लेकिन जैसे-जैसे रिकॉर्ड खंगाले गए, कई गड़बड़ियां सामने आती गईं।
एक स्कूल में 119 बच्चों के नाम दर्ज थे, लेकिन मौके पर सिर्फ 13 बच्चे मौजूद मिले। वहीं, Mid-Day Meal (MDM) रजिस्टर में बच्चों की संख्या बढ़ाकर दिखाई गई थी। साफ है—कागजों में कुछ और, हकीकत में कुछ और।
इन लापरवाहियों पर गिरी गाज
जांच में सामने आई गड़बड़ियों के बाद तुरंत एक्शन लिया गया। प्रभारी प्रधानाध्यापक राजीव कुमार को निलंबित कर दूसरे स्कूल से संबद्ध कर दिया गया।
इसी तरह, एक अन्य स्कूल में भी MDM रिकॉर्ड में हेरफेर मिला, जिसके चलते सहायक अध्यापक रमेशचंद्र सिंह पर भी कार्रवाई हुई।
इसके अलावा कई अन्य प्रधानाध्यापक और शिक्षक भी इस कार्रवाई की चपेट में आए। सभी को फिलहाल दूसरे स्कूलों से अटैच कर दिया गया है और जांच के लिए अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है।
आदेश के बावजूद नहीं किया था जॉइन
दिलचस्प बात यह है कि कुछ प्रधानाध्यापकों का पहले ही ट्रांसफर हो चुका था। उन्हें नए स्कूल में जॉइन करना था, लेकिन उन्होंने अभी तक कार्यभार ग्रहण नहीं किया था। यही लापरवाही अब उनके खिलाफ भारी पड़ गई।
क्यों अहम है यह कार्रवाई?
यह कदम सिर्फ सस्पेंशन तक सीमित नहीं है। यह एक साफ संदेश है—अब स्कूलों में मनमानी नहीं चलेगी।
अगर रिकॉर्ड और ground reality में फर्क मिलेगा, तो कार्रवाई तय है। ठीक वैसे ही जैसे किसी दुकान में हिसाब-किताब गड़बड़ हो जाए, तो जांच तुरंत शुरू हो जाती है।
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