लखनऊ। बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में ग्रीष्मावकाश की अवधि समाप्त होने के साथ ही रविवार को पूरे प्रदेश के शिक्षक समुदाय की निगाहें शासन के संभावित आदेश पर टिकी रहीं। अवकाश बढ़ाए जाने की चर्चाओं के बीच दिनभर सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप और शिक्षक संगठनों में विभिन्न तरह की अटकलें लगती रहीं।
दूर-दराज जनपदों में कार्यरत कई शिक्षक संभावित स्कूल खुलने की तैयारी में अपना सामान समेटने और वापसी की तैयारी करते नजर आए। वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में शिक्षक अपने मोबाइल फोन पर छुट्टियों से जुड़ी हर नई जानकारी पर नजर बनाए रहे।
शिक्षक समूहों में लगातार यह चर्चा चलती रही कि ग्रीष्मावकाश बढ़ाया जाएगा या निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार विद्यालय खुलेंगे। व्हाट्सएप ग्रुपों में तरह-तरह के संदेश और संभावित आदेशों को लेकर कयासबाजी का दौर भी जारी रहा। हालांकि देर शाम तक कोई आधिकारिक आदेश सामने नहीं आया।
इस बीच कई शिक्षक संगठन और शिक्षक प्रतिनिधि भी शासन स्तर से मिलने वाली जानकारी का इंतजार करते रहे। कुछ शिक्षक छुट्टी बढ़ने की संभावना जता रहे थे तो कुछ का कहना था कि विद्यालय निर्धारित तिथि पर ही संचालित होंगे।
महिला शिक्षिकाओं और अन्य शिक्षकों के बीच भी छुट्टियों को लेकर उत्सुकता बनी रही। कई लोग शिक्षक संघों के पदाधिकारियों, एआरपी साथियों और विभागीय अधिकारियों से जानकारी लेने का प्रयास करते रहे, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी।
शिक्षक समुदाय का कहना है कि जनगणना कार्य और भीषण गर्मी के कारण इस बार ग्रीष्मावकाश का अधिकांश समय कार्य में ही बीता है, इसलिए अवकाश बढ़ाने की मांग भी लगातार उठ रही है।
फिलहाल प्रदेश भर के शिक्षकों की निगाहें शासन के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि ग्रीष्मावकाश बढ़ेगा या विद्यालय निर्धारित तिथि से खुल जाएंगे। जब तक कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं होता, तब तक सभी चर्चाओं और दावों को केवल संभावनाओं के रूप में ही देखा जा रहा है।
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