शैक्षणिक गुणवत्ता के आधार पर विश्वविद्यालयों की होगी रेटिंग
लखनऊ। उच्च शिक्षा विभाग अब विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता की निगरानी के साथ उनकी रेटिंग भी करेगा। यूपी प्रमाण पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों और स्थलीय निरीक्षण के आधार पर संस्थानों को लाल, पीला व हरा (रेड, अंबर व ग्रीन) श्रेणी में रखा जाएगा। हालांकि, फिलहाल इसका डिजिटल स्तर पर प्रयोग नहीं किया जाएगा।
उच्च शिक्षा विभाग के उप सचिव राम जन्म चौहान ने बताया है कि विभाग ने इसके लिए नोडल अधिकारियों को जिम्मेदारी दी है। वे समय-समय पर संस्थानों का स्थलीय भ्रमण कर उपलब्ध कराए गए डेटा और अभिलेखों का भौतिक सत्यापन करेंगे। प्रदर्शन के आधार पर रेटिंग तय होगी। ग्रीन श्रेणी में बेहतर व्यवस्था वाले संस्थान, अंबर में अपेक्षित योजना के अनुरूप काम न करने वाले और रेड में गंभीर कमियों वाले संस्थान रखे जाएंगे। लगातार निम्न प्रदर्शन करने वाले संस्थानों की समस्याओं का परीक्षण कर सुधार कराया जाएगा और अगली समीक्षा में अनुपालन भी देखा जाएगा। इसके लिए सभी राज्य विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों और उच्च शिक्षा निदेशक को निर्देश दिए गए हैं।
निगरानी के छह प्रमुख क्षेत्र:
पर्यवेक्षण के लिए विभाग ने छह प्रमुख क्षेत्र तय किए हैं। इनमें शामिल हैं:
स्टूडेंट आउटकम एंड एकेडमिक डिलीवरी
डिजिटल आइडेंटिटी
एबीसी व क्रेडेंशियल
रिसर्च-इनोवेशन एंड इंडस्ट्री लिंकेज
क्वालिटी एंड एक्रीडिटेशन
गवर्नेंस-कम्पलायंस एंड सर्विस डिलीवरी तथा फाइनेंस, पीुपुल एंड ऑपरेशन
इसके अलावा छात्र उपस्थिति, शैक्षणिक सहभागिता, एकेडमिक कैलेंडर, टाइम टेबल व शिक्षण कार्य, नैक, आइक्यूएसी, एनआईआरएफ, शोध प्रकाशन एवं परियोजनाएं, ई-कंटेंट, एलएमएस, डिजिटल शिक्षण, उद्योग आधारित पाठ्यक्रम, एमोयू, इंटर्नशिप, प्लेसमेंट, छात्र सहायता और छात्रवृत्ति की प्रगति भी जांची जाएगी। परफॉर्मेंस इंडिकेटर (केपीआई) आधारित इन क्षेत्रों की भी गुणवत्ता देखी जाएगी।
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