लखनऊ हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों का अध्ययन कराने के आदेश रक्षा खाद्य व अनुसंधान लैबोरेट्री मैसूर के निदेशक को दिए हैं। न्यायालय ने कहा है कि एकीकृत बाल विकास सेवा योजना ( आईसीडीएस स्कीम) के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों पर मिलने वाले पौष्टिक आहार की गुणवत्ता मात्रा और जिस प्रकार से प्रदेश में इस योजना को चलाया जा रहा है, इन सभी बिंदुओं के संबंध में चार सप्ताह में रिपोर्ट दी जाए।
यह आदेश न्यायमूर्ति एआर मसूदी व न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ ने शिप्रा देवी की जनहित याचिका पर पारित किया। याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायालय ने भारत सरकार को भी पक्षकार बनाने का आदेश याची को दिया। न्यायालय ने पाया कि प्रदेश में कुल 1,89,140 आंगनबाड़ी केंद्र उक्त आईसीडीएस स्कीम को चलाने के लिए कार्य कर रहे हैं जबकि आंगनबाड़ी वर्कर्स की संख्या 1,78,706 है और इस योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या 2,22,33,550 है। न्यायालय ने कहा कि वर्ष 1975 में शुरू की गई उक्त योजना का मूल उद्देश्य शिशुओं और स्तनपान करने वाली मांओं के स्वास्थ्य का ख्याल रखना है। न्यायालय ने कहा कि हमारे समक्ष प्रस्तुत डाटा के अवलोकन से पता चलता है कि योजना के कार्यान्वयन में, मुख्य रूप से पौष्टिक आहार के सप्लाई को लेकर, पारदर्शिता की आवश्यकता है। न्यायालय ने कहा कि मामले में कोई भी आदेश देने से पूर्व एक एक्सपर्ट रिपोर्ट मंगा लेना आवश्यक होगा।
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