माध्यमिक शिक्षा परिषद ने जारी की नीति, राजकीय कॉलेजों को प्राथमिकता
लखनऊ। प्रदेश में अब संस्कृत बोर्ड की परीक्षाओं के लिए भी यूपी बोर्ड की तर्ज पर परीक्षा केंद्रों का निर्धारण होगा। इसके लिए माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद ने परीक्षा केंद्र निर्धारण नीति जारी की है। इसमें भी परीक्षा केंद्रों के लिए पहली प्राथमिकता राजकीय विद्यालयों को दी जाएगी।
प्रदेश में संस्कृत शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है। 16 नए राजकीय संस्कृत विद्यालय खोलने की प्रक्रिया चल रही है। यही नहीं, कई जॉब ओरिएंटेड कोर्स भी शुरू किए गए हैं। अब इसकी बोर्ड परीक्षाओं में भी सख्ती शुरू की गई है। माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद ने इसकी शुरुआत केंद्र निर्धारण से कर दी है।
परिषद के अनुसार परीक्षा केंद्र निर्धारण के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक खुद या अपने अधीनस्थ राजपत्रित पदाधिकारियों की टीमों का गठन कर विद्यालयों का सत्यापन कराएंगे। इसमें सीसीटीवी कैमरे,
वायर रिकॉर्डर, राउटर, डीवीआर, हाईस्पीड इंटरनेट कनेक्शन, डबल लॉक अलमारी, बाउंड्रीवाल, क्लास रूम फर्नीचर आदि देखेंगे।
परीक्षा के लिहाज से सुरक्षा मानकों की भी जांच की जाएगी। परिषद निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने कहा है कि परीक्षा केंद्र निर्धारण में राजकीय संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके बाद एडेड संस्कृत विद्यालय, राजकीय इंटर कॉलेज और एडेड माध्यमिक विद्यालयों को केंद्र बनाया जाएगा।
बहुत जरूरी होने पर ही बेहतर संसाधन वाले वित्तविहीन संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों को केंद्र बनाया जाएगा। हालांकि इसमें यह ध्यान रखा जाएगा, जो विद्यालय यूपी बोर्ड परीक्षा के लिए केंद्र बने होंगे, वहां पर संस्कृत परीक्षा के केंद्र नहीं बनेंगे
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