ब्रिटेन जाने के बाद भी वेतन पाने और वीआरएस के बाद पेंशन स्वीकृति मामले में आजमगढ़ निवासी मदरसा शिक्षक शमशुल हुदा के मामले में कम से कम तीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों (डीएमओ) पर कार्रवाई तय है।
सूत्रों के मुताबिक अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय ने आरोपी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए शासन को सिफारिश भेजी है। शमशुल की संदिग्ध गतिविधियों की पुष्टि एटीएस की जांच में होने के बाद उसपर संत कबीनगर में मुकदमा दर्ज करवाया गया था। एटीएस के अलावा ईडी भी शमशुल मामले की जांच कर रही है।
शमशुल वर्ष 1984 में मदरसा शिक्षक बना था। वर्ष 2007 से वह ब्रिटेन में रह रहा था और 2013 में उसे ब्रिटिश नागरिकता भी मिल गई थी। वर्ष 2007 से 2017 तक बिना उसकी सेवा पुस्तिका की जांच किए उसे हर साल वेतन वृद्धि दी जाती रही। वर्ष 2017 में उसने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली। हैरानी की बात यह कि सब कुछ पता होने के बाद भी उसे मानकों के विपरीत पेंशन भी स्वीकृत कर दी गयी। इस दरम्यान संत कबीनगर में तैनात रहे कम से कम तीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों पर कार्रवाई होनी तय मानी जा रही है। शमशुल पर आरोप हैं कि वह ब्रिटेन की नागरिकता लेने के बाद भारत में इस्लाम का प्रचार प्रसार कर रहा था।
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