परिषदीय विद्यालयों में भी 30 जून तक बढ़े ग्रीष्मावकाश, शिक्षा व्यवस्था में समानता आवश्यक
उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के बीच एक गंभीर विसंगति सामने आई है। जहां डिस्ट्रिक्ट कोर्ट, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में ग्रीष्मावकाश 30 जून तक प्रभावी है, वहीं इंटरमीडिएट, विश्वविद्यालय एवं उच्च शिक्षा संस्थानों में भी गर्मी की छुट्टियां 30 जून के बाद समाप्त हो रही हैं।
इसके विपरीत, परिषदीय (बेसिक) विद्यालयों की ग्रीष्मावकाश अवधि 15 जून को समाप्त कर दी गई है और विद्यालय 16 जून से संचालित किए जा रहे हैं। जबकि सबसे कम उम्र के विद्यार्थी—प्राथमिक और उच्च प्राथमिक कक्षाओं के बच्चे—भीषण गर्मी, लू और अपर्याप्त सुविधाओं के बीच विद्यालय आने को मजबूर हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों के अनेक विद्यालयों में आज भी पर्याप्त बिजली, पंखे, शुद्ध पेयजल और बैठने की समुचित व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। कई विद्यालयों में बच्चे फर्श पर बैठकर अध्ययन करते हैं। ऐसे में 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान के दौरान विद्यालय संचालन बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
जब न्यायालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों और माध्यमिक शिक्षा संस्थानों में विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 30 जून तक अवकाश जारी रखा गया है, तो परिषदीय विद्यालयों के नन्हे विद्यार्थियों के साथ अलग व्यवस्था अपनाना न्यायसंगत प्रतीत नहीं होता।
इसलिए सरकार को वर्तमान मौसम परिस्थितियों और बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए परिषदीय विद्यालयों की ग्रीष्मकालीन छुट्टियां भी 30 जून 2026 तक बढ़ाने पर विचार करना चाहिए, ताकि शिक्षा व्यवस्था में समानता स्थापित हो तथा यह विसंगति समाप्त हो सके।
“पहले बच्चों का स्वास्थ्य और सुरक्षा, फिर पढ़ाई” — यही वर्तमान परिस्थितियों में सबसे उपयुक्त और संवेदनशील निर्णय होगा।
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