नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने 8वीं कक्षा के लिए विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक लॉन्च की है। नई किताब में भारतीय वैज्ञानिक ज्ञान, आधुनिक विज्ञान और अब तक की गई खोजों को लेकर एक सेक्शन जोड़ा गया है।
यह आधुनिक वैज्ञानिक सिद्धांतों को भारत के प्राचीन ज्ञान और खोजों के साथ जोड़ती है। इस किताब के जरिये छात्रों आधुनिक विज्ञान को भारतीय नजरिए से समझने का मौका मिलेगा।
का किताब की प्रस्तावना में लिखा गया है कि यह परंपरागत ज्ञान और आधुनिक विज्ञान की शिक्षा मेल विद्यार्थियों में जिज्ञासा, पर्यावरणीय चेतना, नैतिक मूल्यों और समालोचनात्मक सोच को विकसित करने के उद्देश्य से किया गया है। पदार्थ के कणिकीय स्वरूप अध्याय में बताया गया है कि प्राचीन भारतीय दार्शनिक आचार्य कणाद ने सबसे पहले ‘परमाणु’ की अवधारणा दी थी।
स्वास्थ्यः परम निधि नाम के अध्याय में ऐतिहासिक चिकित्सा पद्धति पर प्रकाश डाला गया है, जो आधुनिक वैक्सीन के विकास से बहुत पहले चेचक की रोकथाम के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक पारंपरिक भारतीय विधि है।
इसमें वैश्विक स्वास्थ्य सेवा में भारत की समकालीन भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया है।
इसमें बताया गया है कि कैसे भारतीय वैक्सीन निर्माताओं ने कोविड-19 महामारी के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
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