मौसम: कई जिलों में बहुत भारी बारिश का अलर्ट, गिरेगा पारा; गर्मी से मिलेगी राहत
यूपी में मॉनसून की तीव्रता फिर बढ़ने का पूर्वानुमान है। मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी के ऊपर हवा के निम्नदाब की स्थिति का असर अगले 48 घंटों के दौरान देखने को मिल सकता है। ऐसे में कई जिलों में भारी या बहुत भारी वर्षा भी हो सकती है।
मॉनसून की ट्रफ लाइन सामान्य स्थिति से तराई की ओर घूमी हुई है। इसकी वजह हवा के मध्य क्षोभमंडल में प्रदेश के पूर्वी भाग पर बना चक्रवाती परिसंचरण है। नतीजतन कहीं कहीं ही बारिश हो रही है वह भी छिटपुट। पिछले दो-तीन दिनों में बारिश नहीं होने का असर अब धूप के साथ बढ़ती उमस के रूप में देखा जा रहा है। बुधवार को आसमान पर छिटपुट बादल दिखे, लेकिन दोपहर बाद तेज धूप के साथ उमस ने गर्मी को असहनीय बना दिया।
इसी बीच उत्तरी-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र मजबूत होते हुए उत्तर पश्चिमी दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके असर से 17 जुलाई के बाद प्रदेश में मॉनसूनी सक्रियता बढ़ जाएगी। व्यापक वर्षा में वृद्धि होने के साथ तापमान में गिरावट होगी। इसका असर कुछ जिलों में शुक्रवार की दोपहर बाद ही दिखना शुरू हो सकता है।
अम्बेडकर नगर में 75 मिलीमीटर बारिश
मौसम विभाग के अनुसार बुधवार की सुबह 8:30 बजे तक अंबेडकरनगर के अकबरपुर में सबसे अधिक 75 मिमी बारिश दर्ज की गई है। इसके बाद हमीरपुर के मौदहा में 54 मिमी, मथुरा के गोवर्धन में 44 मिमी, अयोध्या में 42 मिमी, गोरखपुर के बांसगांव में 38 मिमी, फिरोजाबाद के टूंडला में 26 मिमी, बस्ती सीडब्ल्यूसी में 24 मिमी, बलिया के तुर्तीपार में 23.8 मिमी, सिद्धार्थनगर के बांसी तहसील में 23 मिमी और अलीगढ़ में 19.8 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है।
सिंचाई कर धान रोप रहे किसान:
मॉनसून के लचर प्रदर्शन और बारिश की कमी के चलते जिले के किसान पंपिंग सेटों और अन्य वैकल्पिक साधनों से सिंचाई करते हुए धान की रोपाई कर रहे हैं। बीते दिनों हुई बारिश से खेतों में नमी अभी भी मौजूद है। ऐेसे में खेतों की जुलाई से लेकर रोपाई के लिए खेतों को तैयार करने में नमी मददगार हो रही है। हालांकि तेज धूप के कारण दिन में धान रोपने में लोगों को मुश्किलें हो रही हैं।
बाढ़ की संभावनाएं बढ़ीं, लगातार बढ़ रहा जलस्तर
इन दिनों नेपाली पहाड़ों पर हो रही बारिश से जिले के तीनों बैराजों पर पानी का दबाव बढ़ने लगा है। इसलिए अचानक घाघरा का जलस्तर निरंतर बढ़ रहा है। यदि घाघरा के जलस्तर में ऐसे ही बढ़ोत्तरी होती रही तो घाघरा व सरयू नदी के तटवर्ती ग गांव बाढ़ के पानी की जद में जल्द ही आ सकते हैं।
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