भुवनेश्वर. ओडिशा में सरकारी और निजी क्षेत्रों में कार्यरत महिला कर्मचारियों को वेतन के साथ मासिक धर्म की छुट्टी मिलेगी. राज्य की डिप्टी सीएम प्रावती परिदा ने गुरुवार को कटक में स्वतंत्रता दिवस समारोह के बाद यह घोषणा की. डिप्टी सीएम प्रावती परिदा महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रभारी मंत्री भी हैं. उन्होंने कहा कि ” यह छुट्टी वैकल्पिक होगी और महिला की पसंद के आधार पर मासिक धर्म चक्र के पहले या दूसरे दिन ली जा सकती है.” ऐसा करने के साथ ही ओडिशा, बिहार की कतार में शामिल हो गया है, जो कामकाजी महिलाओं के लिए मासिक धर्म की छुट्टी प्रदान करता है.
ओडिशा सरकार की यह पहल सीएम मोहन माझी की सरकार की 100-दिवसीय कार्य योजना का हिस्सा है। माझी ने 12 जून को सीएम के रूप में शपथ ली थी. केरल ने जनवरी 2023 में राज्य के विश्वविद्यालयों में महिला छात्राओं के लिए मासिक धर्म की छुट्टी शुरू की है. पिछली लोकसभा में केरल की कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने एक निजी सदस्य विधेयक के जरिये मासिक धर्म की छुट्टी को पूरे देश में लागू करने की कोशिश की थी. जिसमें कामकाजी महिलाओं के लिए तीन दिन की छुट्टी की मांग की गई थी.
ओडिशा सरकार का यह कदम भारत में मासिक धर्म की छुट्टियों के बारे में नीतियों के बारे में व्यापक बहस के बीच आया है. सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में केंद्र सरकार से महिला कर्मचारियों के लिए मासिक धर्म अवकाश पर एक मॉडल नीति विकसित करने का आग्रह किया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा न्यायिक हस्तक्षेप के बजाय नीति-निर्माण के दायरे में आता है.
मौजूदा वक्त में बिहार और केरल ही एकमात्र भारतीय राज्य हैं जिन्होंने मासिक धर्म की छुट्टियों को लेकर नीतियां लागू की हैं. बिहार में 1992 से महिलाओं को हर महीने दो दिन की वेतन समेत मासिक धर्म छुट्टी दी जाती है. 2023 में केरल ने सभी विश्वविद्यालयों और संस्थानों में महिला छात्राओं को मासिक धर्म अवकाश दिया. भारत में कुछ निजी कंपनियों- जैसे कि जोमैटो ने भी मासिक धर्म पर छुट्टी दी है, जिसमें जोमैटो 2020 से सालाना 10 दिनों की मासिक धर्म छुट्टी देता है.
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