प्रदेश में बिजली दर तय करने की नई नियामवली का मसौदा उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने तैयार किया है, जिसे जल्द जारी किए जाने की सूचना है। मल्टी ईयर टैरिफ रेगुलेशन-2025 के इस मसौदे में तय मानक के आधार पर ही सभी बिजली कंपनियों की बिजली दरें तय की जाएंगी। आयोग में एक प्रस्ताव दाखिल कर उपभोक्ता परिषद ने कहा है कि दबाव में बिजली दरें तय करने के नियम कानून में कोई बदलाव नहीं किया जाए। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा है कि बिजली दरें तय करने के मौजूदा कानून में बदलाव को लेकर पावर कारपोरेशन प्रबंध, ऊर्जा मंत्रालय व निजी औद्योगिक घराने सक्रिय हैं। आशंका जताई है कि मसौदे में ऐसी व्यवस्थाएं प्रस्तावित की जा सकती हैं, जिससे बिजली कंपनियों के निजीकरण के साथ ही निजी घरानों को दरों में बेतहाशा वृद्धि करने का अधिकार मिल जाए।
अवधेश वर्मा ने यह आशंका देखते हुए गुरुवार को ही विद्युत नियामक आयोग में विरोध में प्रस्ताव दाखिल किया। आयोग अध्यक्ष से मुलाकात कर कहा कि कोई भी ऐसा प्रस्ताव स्वीकार नहीं है, जिसमें उपभोक्ताओं का नुकसान हो। ये मामले अपीलेट ट्रिब्यूनल दिल्ली में लंबित हैं।
लगातार तीसरे दिन काली पट्टी बांध निजीकरण का विरोध
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के आह्वान पर गुरुवार को लगातार तीसरे दिन बिजली कंपनियों के निजीकरण के विरोध में बिजल कर्मियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध का इजहार किया। संघर्ष समिति ने कहा है कि भारत सरकार ने निजीकरण के लिए बिडिंग डाक्यूमेंट की अनुमति दी ही नहीं है तो किस डाक्यूमेंट के आधार पर निजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। आंदोलित बिजलीकर्मी किसी भी स्थिति में निजीकरण स्वीकार नहीं करेंगे। वहीं राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर संगठन न भी गुरुवार को लखनऊ सहित प्रदेश के सभी 75 जिलों में काला फीता बांधकर कार्य किया।
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