📰 शिक्षामित्र का दर्द: योग्यता के बावजूद ₹10 हजार में गुजारा, व्यवस्था पर उठे सवाल
उत्तर प्रदेश, विशेष रिपोर्ट:
प्रदेश में शिक्षामित्रों की स्थिति को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक शिक्षामित्र ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा कि उनके पास वह शैक्षिक प्रमाणपत्र है, जो प्रदेश के ढाई लाख से अधिक नियमित शिक्षकों के पास नहीं है, फिर भी उन्हें मात्र ₹10 हजार प्रतिमाह में परिवार चलाना पड़ रहा है।
🗣️ “मैं गांव का टॉपर था, फिर भी पीछे रह गया”
शिक्षामित्र का कहना है कि जिस समय उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की, वे अपने गांव के टॉपर थे। उनके पास आवश्यक योग्यता और प्रमाणपत्र भी मौजूद हैं, लेकिन व्यवस्था की खामियों के चलते आज वे कम वेतन पर काम करने को मजबूर हैं।
📊 वेतन असमानता पर सवाल
जहां एक ओर नियमित शिक्षक लाखों का वार्षिक वेतन प्राप्त कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शिक्षामित्रों को बेहद कम मानदेय में काम करना पड़ रहा है। यह अंतर केवल नियुक्ति प्रक्रिया और समय के अंतर का परिणाम बताया जा रहा है।
⚖️ “समान कार्य के लिए समान वेतन” की मांग तेज
शिक्षामित्रों का कहना है कि जब कार्य और जिम्मेदारियां समान हैं, तो वेतन में इतना बड़ा अंतर क्यों? इस मुद्दे को लेकर लंबे समय से आंदोलन और न्यायालय में सुनवाई भी जारी है।
📌 सरकार से हस्तक्षेप की मांग
शिक्षामित्रों ने सरकार से अपील की है कि उनकी योग्यता और अनुभव को देखते हुए वेतन और सेवा शर्तों में सुधार किया जाए, ताकि वे भी सम्मानजनक जीवन जी सकें।
👉 यह मामला केवल एक व्यक्ति की पीड़ा नहीं, बल्कि प्रदेश के हजारों शिक्षामित्रों की हकीकत को उजागर करता है।
Basic Shiksha Khabar | PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News | Primarykamaster | Updatemarts | Primary Ka Master | Basic Shiksha News | Uptet News | primarykamaster | SHIKSHAMITRA






