प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि तथ्य छुपाकर हासिल की गई अनुकंपा नियुक्ति अवैध है। इसका उद्देश्य संकट में फंसे परिवारों को तत्काल राहत प्रदान करना है, न कि करियर बनाने का साधन। यह टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति विवेक कुमार बिड़ला और न्यायमूर्ति योगेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने शिवदत्त शर्मा की विशेष अपील खारिज कर दी।
बुलंदशहर के शिवदत्त शर्मा को उनके पिता राम स्वरूप शर्मा की मृत्यु के बाद 10 नवंबर 1981 को जूनियर
हाई स्कूल, बड़ागांव, विकास क्षेत्र अरनिया, जिला बुलन्दशहर में चौकीदार के पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी गई थी। विभागीय अनुमति से उन्होंने बी.एड की पढ़ाई पूरी पूरी की।
1986 में बी.एड योग्यता के आधार पर उन्हें सहायक शिक्षक के रूप में नियुक्त किया गया। 2019 सेवानिवृत्ति से कुछ समय पहले उन पर आरोप लगाया गया कि अपीलकर्ता ने सहायक शिक्षक पद प्राप्त करने के लिए चौकीदार के रूप में अपनी
पिछली नियुक्ति को छुपाया था। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने इस पर स्पष्टीकरण मांगा और जांच के बाद नियुक्ति को रद्द कर दिया। इसके खिलाफ शिवदत्त शर्मा की ओर से याचिका दाखिल की गई थी, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद विशेष अपील दायर की गई।
न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि किसी भी महत्वपूर्ण तथ्य को छुपाने से अनुकंपा नियुक्तियों की वैधता खराब हो जाती है। न्यायालय ने अपीलकर्ता की नियुक्ति रद्द करने के फैसले को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी
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