प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के सभी शैक्षणिक संस्थानों के खेल मैदान और अचल संपत्तियों के व्यावसायिक उपयोग पर रोक लगा दी है। ऐसे में वहां प्रदर्शनी, व्यापार मेले का आयोजन नहीं किया जा सकेगा। कोर्ट ने सरकार को इस संबंध में जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और सभी शैक्षणिक संस्थानों को एक माह के अंदर परिपत्र जारी करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने गिरजा शंकर की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर दिया है। हमीरपुर निवासी गिरजा शंकर ने राठ स्थित ब्रह्मानंद डिग्री कॉलेज परिसर में आयोजित किए जा रहे एक व्यावसायिक मेले को रोकने की मांग कर जनहित याचिका दाखिल की थी।
उनका कहना था कि शैक्षणिक संस्थान शिक्षा प्रदान करने के लिए है। यहां पर व्यावसायिक गतिविधियां नहीं की जानी चाहिए। हाईकोर्ट के 2020 में पारित एक फैसले का भी हवाला दिया गया जिसमें न्यायालय ने राज्य सरकार को सभी डीएम को शैक्षणिक संस्थानों की संपत्तियों का व्यावसायिक उपयोग करने पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। प्रतिवादियों ने कहा कि मेला समाप्त हो गया है। इसलिए अब यह
याचिका अर्थहीन हो चुकी है।
कोर्ट ने याचिका को अर्थहीन नहीं माना। क्योंकि, इसमें शामिल मुख्य मुद्दा महत्वपूर्ण सार्वजनिक महत्व का है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शैक्षणिक संस्थान केवल शिक्षा प्रदान करने के लिए हैं। वहां शैक्षणिक, खेल और सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं आयोजित की जानी चाहिए।
कोर्ट ने उप-जिला मजिस्ट्रेट (एसडीएम), राठ, हमीरपुर की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण को पूरी तरह से बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें परिसर का उपयोग अन्य गतिविधियों के लिए करने की रोक के बारे में जानकारी नहीं थी।
आदेश की कॉपी मुख्य सचिव को भेजें: हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि वे आदेश की एक प्रति एक सप्ताह के भीतर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को भेजें। साथ ही न्यायालय ने निर्देश दिया कि ब्रह्मानंद डिग्री कॉलेज के खेल के मैदान को अब किसी भी व्यावसायिक गतिविधि के लिए उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
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