TET अनिवार्यता पर कानूनी बहस: क्या यह नियम केवल नई नियुक्तियों पर लागू होता है?
1. *NCTE अधिसूचना में “Appointment” शब्द का प्रयोग*
भारत सरकार ने National Council for Teacher Education को Right of Children to Free and Compulsory Education Act, 2009 की धारा 23(1) के तहत शिक्षक की न्यूनतम योग्यता तय करने का अधिकार दिया।
इसी अधिकार के आधार पर NCTE ने 23 अगस्त 2010 को एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की। इस अधिसूचना में स्पष्ट लिखा गया:
> “Minimum qualifications for a person to be eligible for appointment as a teacher in classes I to VIII.”
इसका अर्थ यह है कि NCTE ने TET को शिक्षक बनने के लिए न्यूनतम योग्यता के रूप में निर्धारित किया।
यहाँ “eligible for appointment” शब्द अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका कानूनी अर्थ है:
यह शर्त नियुक्ति से पहले लागू होती है
यह उन लोगों पर लागू होती है जो भविष्य में शिक्षक बनने के लिए आवेदन करेंगे
अधिसूचना में कहीं भी यह नहीं लिखा गया कि:
पहले से कार्यरत शिक्षकों को भी यह योग्यता प्राप्त करनी होगी
अन्यथा उनकी सेवा समाप्त हो जाएगी
इस प्रकार अधिसूचना की भाषा यह संकेत देती है कि TET मुख्यतः नई नियुक्तियों के लिए मानक तय करने का उपकरण था।
2. RTE Act की धारा 23 का उद्देश्य
Right of Children to Free and Compulsory Education Act, 2009 की धारा 23(1) में कहा गया है कि:
केंद्र सरकार एक Academic Authority नियुक्त करेगी जो शिक्षक की न्यूनतम योग्यता तय करेगी।
इसके बाद केंद्र सरकार ने NCTE को यह जिम्मेदारी दी।
धारा 23 का उद्देश्य मुख्यतः दो चीजें सुनिश्चित करना था:
1️⃣ देशभर में शिक्षक भर्ती के लिए एक समान न्यूनतम योग्यता तय करना
2️⃣ शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना
लेकिन इस धारा में कहीं भी यह नहीं लिखा गया कि:
पहले से कार्यरत शिक्षकों को अयोग्य घोषित किया जा सकता है
या उनकी नौकरी समाप्त की जा सकती है
इससे स्पष्ट होता है कि RTE Act का उद्देश्य भविष्य की शिक्षक भर्ती को नियंत्रित करना था।
3. Retrospective Law का सिद्धांत
भारतीय विधि व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है:
कानून सामान्यतः Prospective होता है, Retrospective नहीं।
Prospective का अर्थ है:
कानून भविष्य में लागू होगा
Retrospective का अर्थ है:
कानून पिछली घटनाओं पर लागू होगा
भारतीय न्यायालयों ने कई मामलों में कहा है कि:
> जब तक किसी कानून में स्पष्ट रूप से “retrospective effect” नहीं लिखा हो, तब तक उसे पिछली तिथि से लागू नहीं माना जाएगा।
NCTE की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि इसे पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर भी लागू किया जाएगा।
इसलिए विधिक सिद्धांत के अनुसार इसे सामान्यतः भविष्य की नियुक्तियों के लिए बनाया गया नियम माना जाता है।
4. नियुक्ति के समय की योग्यता का सिद्धांत
Service Law का एक अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्धांत है:
> “Qualification applicable at the time of appointment shall govern the service.”
इसका अर्थ है:
किसी कर्मचारी की वैध योग्यता वही होती है जो नियुक्ति के समय लागू थी।
उदाहरण के लिए:
यदि किसी शिक्षक की नियुक्ति 2005 में हुई
और उस समय TET की शर्त नहीं थी
तो सामान्यतः उस शिक्षक की नियुक्ति वैध मानी जाएगी क्योंकि उसने उस समय की सभी आवश्यक योग्यताएँ पूरी की थीं।
यह सिद्धांत सरकारी सेवा में सेवा सुरक्षा (Service Security) का आधार माना जाता है।
5. संविधान का अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार)
Article 14 of the Constitution of India
अनुच्छेद 14 कहता है कि:
> कानून के समक्ष सभी व्यक्ति समान हैं।
यदि दो शिक्षक समान पद पर कार्य कर रहे हों और उनमें से किसी एक को केवल इसलिए अयोग्य कहा जाए कि बाद में नया नियम लागू हुआ, तो यह समानता के सिद्धांत पर प्रश्न खड़ा कर सकता है।
उदाहरण:
शिक्षक A की नियुक्ति 2005 में हुई
शिक्षक B की नियुक्ति 2015 में हुई
दोनों एक ही पद पर काम कर रहे हैं।
यदि केवल A को अयोग्य घोषित किया जाए क्योंकि उसने TET नहीं दिया, तो यह समानता के सिद्धांत के खिलाफ तर्क उत्पन्न कर सकता है।
6. संविधान का अनुच्छेद 16 (सरकारी नौकरी में समान अवसर)
Article 16 of the Constitution of India
अनुच्छेद 16 सरकारी नौकरियों में समान अवसर सुनिश्चित करता है।
जब कोई व्यक्ति सरकारी सेवा में नियुक्त हो जाता है और:
उसने नियुक्ति के समय की सभी योग्यताएँ पूरी की हों
चयन प्रक्रिया वैध हो
तो उसे एक प्रकार का service protection प्राप्त होता है।
यदि कई वर्षों बाद नई योग्यता लागू कर दी जाए और उसी आधार पर किसी कर्मचारी को अयोग्य कहा जाए, तो यह सेवा सुरक्षा के सिद्धांत पर प्रश्न खड़ा कर सकता है।
7. RTE Act में Relaxation का प्रावधान
RTE Act की धारा 23(2) में एक महत्वपूर्ण प्रावधान है।
इस धारा के अनुसार:
यदि किसी राज्य में पर्याप्त योग्य शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, तो केंद्र सरकार न्यूनतम योग्यता में अस्थायी छूट (Relaxation) दे सकती है।
इस प्रावधान का उद्देश्य है:
शिक्षा व्यवस्था को बाधित होने से बचाना
शिक्षक की कमी होने पर लचीलापन देना
इसका मतलब यह भी है कि:
कानून स्वयं मानता है कि कुछ परिस्थितियों में योग्यता के नियमों में छूट दी जा सकती है।
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