न्यूनतम योग्यता वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर होगा विचार, 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रखा प्रस्ताव – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में 69,000 सहायक शिक्षकों की भर्ती के मामले में नियुक्ति की योग्यता रखने वाले लेकिन चयन सूची से बाहर रह गए आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए एक नई उम्मीद जगी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वह उन अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने पर विचार करने के लिए राजी है, जो हाई कोर्ट की खंडपीठ के 13 अगस्त 2024 के आदेश के अनुसार मूल चयन सूची में शामिल होने की योग्यता रखते हैं। हालांकि, यह नियुक्ति उम्मीदवारों की प्राथमिक शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता मानदंडों को पूरा करने और उपलब्ध रिक्तियों के अधीन होगी।

राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्णय मामले की विशिष्ट परिस्थितियों को देखते हुए लिया जाएगा और इसे भविष्य में किसी अन्य चयन में नजीर नहीं माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार की ओर से दिए गए इस प्रस्ताव को रिकार्ड पर लिया और प्रक्रिया तैयार करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है। मामले की आठ सप्ताह बाद फिर सुनवाई होगी।

इस भर्ती का मामला 2018 से लंबित है। सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ के 13 अगस्त 2024 के फैसले को चुनौती दी है। हाई कोर्ट ने भर्ती की मेरिट लिस्ट को रद कर दिया था और प्रदेश सरकार को आदेश दिया था कि इस शिक्षक भर्ती की पूरी लिस्ट को मूल चयन सूची के रूप में आरक्षण के सभी नियमों के अनुसार तीन महीने के भीतर फिर से तैयार किया जाए।

रद हुई चयन सूची के अनुसार, सामान्य वर्ग के जिन शिक्षकों की नियुक्ति हो चुकी थी, उन्होंने नौकरी पर खतरे को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की है। सुप्रीम कोर्ट ने शुरू में ही हाई कोर्ट के इस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। आरक्षण के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा रहे आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने भी सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप अर्जियां दाखिल की हैं और वे मूल याचिका में प्रतिवादी भी हैं। पिछली सुनवाई पर आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के वकील मनीष गोस्वामी ने कहा था

कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के साथ इस मामले में अन्याय हुआ है और वे न्याय के लिए 2020 से भटक रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मांग यह नहीं है कि जिन शिक्षकों की भर्ती हो गई है और जो पांच साल से नौकरी कर रहे हैं, उन्हें नौकरी से बाहर किया जाए।

इस सिलसिले में मंगलवार को जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ में हुई सुनवाई में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश एडीशनल सालिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और अंकित गोयल ने राज्य सरकार का प्रस्ताव कोर्ट के समक्ष रखा। भाटी ने कहा कि राज्य सरकार मामले पर विचार करने के लिए राजी है और प्रक्रिया पूरी करके कोर्ट में स्थिति रिपोर्ट देगी। कोर्ट ने उनके प्रस्ताव को रिकार्ड पर लेते हुए राज्य सरकार को छह सप्ताह का समय दिया। दूसरी ओर, कुछ वकीलों ने प्रदेश सरकार के प्रस्ताव पर दलीलें देने की कोशिश की, लेकिन पीठ ने कहा कि पहले राज्य सरकार को काम करने दिया जाए।

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