उदयनाथ शुक्ल, चंदौली। वित्त पोषित माध्यमिक विद्यालयों में वर्ष 1981 से 2000 के मध्य हुई शिक्षकों और शिक्षणेतर कर्मियों की नियुक्तियों की विजिलेंस जांच होगी। इन वर्षों में नियुक्त पाने वाले लगभग 380 शिक्षक व शिक्षणेतर कर्मी जांच के दायरे में आएंगे। इसके लिए शासन की ओर से पत्रावली मांगे जाने से शिक्षा विभाग के अधिकारी सकते में इसलिए आ गए हैं कि इतना पुराना रिकार्ड किस तरह जुटाया जाए। हालांकि आदेश के बाद विभाग ने इन वर्षों नियुक्त किए गए शिक्षकों व कर्मचारियों का विवरण जुटाना शुरू कर दिया है।
जनपद में 248 माध्यमिक विद्यालय हैं। इनमें 34 वित्त पोषित हैं। यहां 550 से अधिक शिक्षक व कर्मचारी नियुक्त हैं। इनमें पहले नियुक्ति का अधिकार प्रबंधक के पास होता था और डीआइओएस अनुमोदन करते थे। ऐसे में प्रबंधक व डीआइओएस मिलकर नियुक्ति में फर्जीवाड़ा करते रहे।
कई शिक्षक-कर्मचारी फर्जी ढंग से रख लिए गए थे। इन स्कूलों में नियुक्त होने वाले शिक्षक, शिक्षणेतर कर्मियों की नियुक्ति पर शुरुआत से ही सवाल उठते रहे हैं। हालांकि अब चयन आयोग से राजकीय व वित्त पोषित स्कूलों में शिक्षक रखे जाते हैं। विभाग के अनुसार, अयोध्या में शिक्षक व कर्मियों की नियुक्त में फर्जीवाड़े के मामले सामने आए हैं। यहां के बाद जांच की आंच जिले में भी पहुंच गई है। यह जांच पूरे प्रदेश में कराई जा रही।
19 वर्षों में हुई नियुक्ति का खंगाला जा रहा रिकॉर्ड
माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने 19 वर्षों के मध्य इन स्कूलों में नियुक्त किए गए शिक्षक व शिक्षणेतर कर्मियों की पत्रावली उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इनका रिकार्ड खंगाला जा रहा है। विभाग के समक्ष पुराने रिकार्ड को एकत्रित करने की चुनौती है। इन वर्षों में भर्ती हुए अधिकतर शिक्षक व कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
जनपद का सृजन वर्ष 1997 में हुआ। ऐसे में वर्ष 1981 से सृजन वर्ष तक के रिकार्ड खंगालने में संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य व लिपिक परेशान हैं।
जिला विद्यालय निरीक्षक दल सिंगार यादव ने बताया- वित्त पोषित माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक व कर्मियों की विजिलेंस जांच के लिए पत्रावली शासन स्तर से मांगी गई है। इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अधिकांश पत्रावली जुटाकर जमा करने का प्रयास होगा।
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