ग्रामीण क्षेत्रों में साइकिल से स्कूल जाने वाले छात्रों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है और इस ‘मौन क्रांति’ का नेतृत्व लड़कियां कर रही हैं। आईआईटी-दिल्ली और नरसी मोनजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज में हुए एक शोध में ये तथ्य सामने आए हैं।
जर्नल ऑफ ट्रांसपोर्ट जियोग्राफी में प्रकाशित शोध के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर स्कूल जाने के लिए साइकिल के इस्तेमाल का स्तर दशक (2007 से 2017) में 6.6 प्रतिशत से बढ़कर 11.2 प्रतिशत हो गया है। ग्रामीण भारत में ये स्तर लगभग दोगुना (6.3 प्रतिशत से 12.3 प्रतिशत) हो गया है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह लगभग स्थिर (7.8 प्रतिशत से 8.3 प्रतिशत) रहा है। चार जनसंख्या उप-समूहों में, साइकिल चलाने में सबसे अधिक वृद्धि ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों के बीच हुई है। आईआईटी-दिल्ली के परिवहन अनुसंधान एवं चोट निवारण केंद्र की पीएचडी शोधार्थी सृष्टि अग्रवाल के अनुसार, लैंगिक मानदंड, साइकिल की उपलब्धता, स्कूल की दूरी और सड़कों पर सुरक्षा भारत में कुछ ऐसे प्रमुख कारक हैं, जिनके चलते साइकिल से स्कूल जाने वाले छात्रों की संख्या बढ़ रही है। साइकिल वितरण योजनाओं ने साइकिल चलाने को बढ़ावा देने में मदद की है।
बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में इस्तेमाल बढ़ा
शोध के मुताबिक, लड़कियों के बीच साइकिल चलाने में सबसे अधिक वृद्धि बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में देखी गई, जहां यह स्तर आठ गुना बढ़ गया। पश्चिम बंगाल में लड़कियों के बीच साइकिल चलाने में तीन गुना वृद्धि हुई, जिससे ये देश भर में ग्रामीण लड़कियों के बीच साइकिल चलाने के उच्चतम स्तर वाले राज्य बन गये। उत्तर प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु के ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों के बीच साइकिल चलाने का स्तर लगभग दोगुना हो गया है।
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