मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मारे गए एक अग्निवीर की मां की याचिका का जवाब न देने पर मंगलवार को केंद्र से नाखुशी जताई और भारी जुर्माना लगाने की चेतावनी दी। मां ने अग्निवीरों के लिए भी सैनिकों के समान मरणोपरांत लाभ देने की मांग की थी।
न्यायमूर्ति रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति हितेन वेनेगांवकर की पीठ ने केंद्र को अग्निवीर मुरली नाइक की मां की याचिका के जवाब में अपना हलफनामा दाखिल करने के लिए 6 मई तक का समय दिया। नाइक पिछले साल मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जम्मू कश्मीर में सीमा पार से हुई गोलाबारी में मारे गए थे।
मुरली नाइक की मां ज्योतिबाई नाइक ने अपनी याचिका में कहा कि केंद्र की अग्निपथ योजना अग्निवीरों और नियमित सैनिकों के बीच मनमाना फर्क पैदा करती है। उन्होंने परिवार को मरणोपरांत मिलने वाले पूरे लाभ नहीं दिए जाने में भेदभाव का आरोप लगाया।
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