बोर्ड परीक्षा के प्रदेश टॉपर से वापस लिया जाएगा मेडल और प्रशस्ति पत्र, कूटरचित दस्तावेज से परीक्षा पास करने का आरोप
प्रयागराज। कूटरचित दस्तावेज के सहारे उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की उत्तर मध्यमा परीक्षा देकर प्रदेश टॉपर बने रजनीश यादव की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। शासन ने टॉपर से मेडल और प्रशस्ति पत्र वापस लेने के साथ सम्मान राशि भी जमा कराने का आदेश डीआईओएस को दिया है।
शासन के निर्देश पर डीआईओएस ओमकार राणा के नेतृत्व में जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की गई थी। टीम ने श्री राम टहल संस्कृत उच्च माध्यमिक विद्यालय, यदुनाथपुर, सैफाबाद के प्रधानाचार्य से प्राप्त अभिलेखों के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी। रिपोर्ट के बाद शासन ने टॉपर के खिलाफ कार्रवाई का आदेश डीआईओएस को दिया है।
प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर रजनीश यादव को शासन की ओर से मेधावी सम्मान की धनराशि, टैबलेट, मेडल और प्रशस्ति पत्र दिया गया था। अब उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद के निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने आदेश जारी कर टॉपर के शैक्षिक अभिलेख निरस्त करने के निर्देश दिए हैं।
आदेश में कहा गया है कि जांच आख्या और उपलब्ध अभिलेखीय साक्ष्यों से यह पुष्टि होती है कि छात्र रजनीश यादव ने कथित रूप से कूटरचित दस्तावेज तैयार कर पूर्व मध्यमा से उत्तर मध्यमा तक की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। निदेशक ने रजनीश यादव के शैक्षिक अभिलेख को निरस्त करने का निर्देश दिया है।
आधार कार्ड में भी दर्ज कराई गई थी गलत जन्मतिथि
जांच में सामने आया कि कूटरचित दस्तावेज में छिपाई गई पहचान के तहत रजनीश यादव ने 89.36 प्रतिशत अंक प्राप्त कर टॉपर का स्थान हासिल किया था। दस्तावेजों में पहचान छिपाने के लिए अजय कुमार नाम के आधार कार्ड का सहारा लिया गया। इसमें रजनीश की जन्मतिथि 13 मई 1998 के स्थान पर हेरफेर कर 1 जुलाई 2010 कर दी गई थी।
मामले में शासन के आदेश के बाद अब रजनीश यादव को दिए गए सम्मान और शैक्षिक अभिलेखों पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
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