शिक्षकविहीन न रहें विद्यालय, गुणवत्ता पर करें फोकस : योगी

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 लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सरकार के पास पैसे की कोई कमी नहीं है। प्रदेश का कोई भी विद्यालय शिक्षकविहीन नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरा फोकस गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर करें। वे शनिवार को अपने सरकारी आवास पर बेसिक शिक्षा विभाग के कामकाज की समीक्षा कर रहे थे।

उन्होंने अधिकारियों को सीएम मॉडल कंपोजिट और मुख्यमंत्री अभ्युदय कंपोजिट विद्यालयों में खेल के मैदान, ट्रेनिंग सेंटर और न्यू एज कोर्स की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। कहा, सरकार ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में 925 तथा वर्ष 2024-25 में 785 शासकीय विद्यालयों को पीएमश्री योजना के तहत उच्चीकरण कराया है। इन विद्यालयों को इंटीग्रेटेड कैंपस के रूप में विकसित किया जाए। सीएम ने कहा कि एक से 15 अप्रैल तक और जुलाई में 15 दिन का स्कूल चलो अभियान चलाएं। शिक्षकों, ग्राम

प्रधानों व ग्राम पंचायत सदस्यों के साथ मिलकर स्कूल चलो अभियान को एक उत्सव का रूप दिया जाए ताकि बच्चों को नया अनुभव मिले। उन्होंने कहा कि शिक्षक और प्रधानाचार्य गांवों में घर-घर जाकर बच्चों को स्कूल आने के लिए प्रेरित करें। कस्तूरचा गांधी बालिका विद्यालयों की व्यवस्थाओं को भी बेहतर बनाएं। कहा, शिक्षकों को अच्छे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ना होगा, ताकि लर्निंग आउटकम को और बेहतर किया जा सके।

उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से आरटीई के तहत 2016-17 में 10784 बच्चे लाभान्वित हुए थे, वहीं 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 4.58 लाख से अधिक हो गई है। बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह, अपर मुख्य सचिव बेसिक, माध्यमिक व वित्त दीपक कुमार, महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा भी शामिल हुई। 

आकांक्षात्मक जिलों में शिक्षक-छात्र अनुपात सुधारें

सीएम ने कहा कि सभी आकांक्षात्मक जिलों व ब्लॉकों में शिक्षक-छात्र का अनुपात बेहतर करें। सभी परिषदीय विद्यालयों में बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इन विद्यालयों में पेयजल, अच्छे क्लास रूम, बिजली की सुविधा, बाउंड्रीवाल व अच्छे फर्नीचर उपलब्ध कराया गया है।

समर कैंप चलाएं, बच्चों को सिखाएं नई चीजें

योगी ने कहा कि पहले चरण में 13 डायट की सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है। डायट को एक संसाधन केंद्र के रूप में विकसित कर समावेशी शिक्षा को आगे बढ़ाया जाएगा। इसलिए आईआईएम लखनऊ और बंगलुरू जैसे संस्थानों के ट्रेनिंग मॉड्यूल से इसे जोड़ा जाए। उन्होंने अधिकारियों को समर कैंप चलाने के लिए भी निर्देश दिया। बच्चों को खेल-खेल में नई चीजों को सिखाने पर जोर देते हुए उन्होंने कैंप सुबह ही चलाने के निर्देश दिए।

छात्रों की उपस्थिति बढ़ी

सीएम ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में हुए प्रयासों के परिणाम आज असर रिपोर्ट में साफ दिख रहा है। वर्ष 2024 की रिपोर्ट में प्रदेश की शिक्षा गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इससे यूपी अब टॉप परफॉर्मिंग प्रदेश बन गया है। प्राथमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति वर्ष 2010 में 57 फीसदी थी जो वर्ष 2024 में बढ़कर 71.4 प्रतिशत हो गई है। लड़कों की तुलना में बालिकाओं का नामांकन भी बढ़ा है।

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