सरकार इस कानून को नई जनगणना और उसके बाद परिसीमन के बजाए 2011 की जनगणना के आधार पर ही लागू करना चाहती है, ताकि 2029 को लोकसभा चुनाव में और पहले होने वाले विधानसभा चुनावों में ही लागू किया जा सके। लोकसभा, विधानसभाओं में 50 फीसदी सीटों को बढ़ाने और कुल सीटों में 33 फीसदी सीटों को महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान संभव है। लोकसभा में इससे 816 सीटें होने और उनमें 273 आरक्षित हो सकेंगी। सरकार ने मौजूदा बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले ही इस तरह के संकेत दिए थे। सूत्रों के अनुसार सोमवार को सरकार ने इस बारे में संसद में विभिन्न दलों के नेताओं से विचार विमर्श शुरू कर दिया है। सोमवार को बीजद, शिवसेना (यूबीटी, राकांपा (एसपी), वायएसआर कांग्रेस, एआईएमआईएम के नेताओं से गृह मंत्री अमित शाह ने चर्चा की है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने कहा है कि वह खिलाफ नहीं हैं, चूंकि उन्होंने विधेयक देखा नहीं है चर्चा भी नहीं हुई है इसलिए चाहेंगे कि सरकार सर्वदलीय बैठक बुलाए और चर्चा करे।
इसी सप्ताह आ सकता है संशोधन विधेयक
सूत्रों का कहना है कि सरकार इस सप्ताह अंत में लोकसभा में संशोधन विधेयक ला सकती है, जिसमें वह 2023 में महिला आरक्षण के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन करेगी। उसमें से नई जनगणना और परिसीमन बाद लागू करने का प्रावधान हटा देगी। इसे 2011 की जनगणना के आधार पर लागू करने का प्रावधान करेगी। उसके आधार पर परिसीमन भी होगा, ताकि उत्तर, दक्षिण के राज्यों में जनसंख्या को लेकर विवाद न बने।
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