प्रयागराज स्थित इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में 13 माह के मासूम बच्चे की कस्टडी उसके पिता को सौंप दी। अदालत ने कहा कि बच्चे के नैसर्गिक विकास के लिए अपने जैविक अभिभावक, विशेषकर पिता के साथ रहना सर्वोत्तम होता है।
यह आदेश न्यायमूर्ति संदीप जैन की पीठ ने सुनाया। मामले में बच्चे की मां के निधन के बाद वह अपने ननिहाल पक्ष के पास रह रहा था। पिता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पाया कि बच्चे के हित और भविष्य को ध्यान में रखते हुए पिता को कस्टडी देना उचित है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चे के पालन-पोषण के लिए पिता सक्षम हैं और उनके परिवार से भी सहयोग मिलेगा। वहीं, ननिहाल पक्ष (मौसा-मौसी) को बच्चे से मिलने के लिए विजिटेशन राइट्स देने की अनुमति दी गई है, ताकि भावनात्मक संबंध बने रहें।
कोर्ट ने कहा कि यदि कम उम्र में बच्चे को पिता से दूर रखा जाता है, तो उसके भावनात्मक और मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए बच्चे के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता देते हुए यह फैसला सुनाया गया।
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