सहायता प्राप्त स्कूलों में डेढ़ रुपये में सालभर कैसे चले पंखे – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

primarymaster.in


 

16 साल से नहीं बढ़ा शुल्क, सुविधाओं के अभाव में घट रहा नामांकन, बढ़ रहा आर्थिक संकट

लखनऊ। महंगाई के इस दौर में सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज भी कई मदों में छात्रों से वही शुल्क लिया जा रहा है जो करीब 16 वर्ष पहले तय किया गया था। विकास शुल्क दो रुपये, पंखा शुल्क डेढ़ रुपये और कला शुल्क 1.20 रुपये जैसे शुल्कों के सहारे कॉलेजों को अपने संस्थानों का संचालन करना पड़ रहा है। ऐसे में अधिकांश सहायता प्राप्त कॉलेज आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।

कॉलेज प्रबंधकों का कहना है कि इतने सीमित शुल्क से न तो आधारभूत सुविधाओं का विस्तार संभव है और न ही मौजूदा व्यवस्थाओं का समुचित रखरखाव। कई स्कूलों में शौचालय और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं तक का संकट है। कहीं भवन जर्जर हैं तो कहीं बिजली बिल का भुगतान भी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में छात्रों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना मुश्किल हो रहा है। इसका असर नामांकन पर पड़ रहा है। अभिभावक बच्चों को निजी विद्यालयों में भेजने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

पिछले वर्ष शुल्क बढ़ाने की उठी थी मांग

सहायता प्राप्त प्रबंधक महासभा के अनुसार पिछले वर्ष मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन देकर शुल्क बढ़ाने की मांग की गई थी। महासभा का कहना है कि उनकी मांग शुल्क को कम से कम दोगुना करने की थी। उनका तर्क है कि दोगुना शुल्क होने पर भी यह महंगाई को देखते हुए काफी कम रहेगा, लेकिन इससे कॉलेजों को कुछ राहत अवश्य मिल सकती है।

वर्तमान शुल्क संरचना

मद कक्षा 6, 7, 8 कक्षा 9, 10 कक्षा 11, 12
मासिक शुल्क
विकास 2.00 रु. 5.00 रु. 8.00 रु.
खेल 30 पैसे 40 पैसे 60 पैसे
विज्ञान 30 पैसे 1.20 रु. 2.00 रु.
स्काउट 30 पैसे 1.00 रु. 2.00 रु.
रेडक्रास 10 पैसे 20 पैसे 20 पैसे
वार्षिक शुल्क
पंखा 1.50 रु. 1.50 रु. 1.50 रु.
निर्धन शुल्क 1.20 रु. 1.20 रु. 1.20 रु.
जलपान 6.00 रु. 6.00 रु. 6.00 रु.
वाचनालय 4.00 रु. 6.00 रु. 8.00 रु.
श्रव्य-दृश्य 1.00 रु. 1.00 रु. 1.20 रु.
कला 1.20 रु. 1.20 रु. 2.00 रु.
पत्रिका 3.00 रु. 5.00 रु. 5.00 रु.
प्रमाण पत्र 1.00 रु. 1.00 रु.
पुनः प्रवेश 1.00 रु. 1.00 रु. 1.00 रु.

“माध्यमिक शिक्षा परिषद ने इन 16 वर्षों में अपना शुल्क तो 10 गुना बढ़ा लिया है, लेकिन एडेड कॉलेजों को शुल्क बढ़ाने की अनुमति नहीं दी गई है। आज हालत ये है कि सरकार की अलग योजना में हम आवेदन भी करना चाहें तो हमारे पास 25 प्रतिशत बजट नहीं है।”
अरविंद कुमार, कार्यकारी अध्यक्ष, अशासकीय सहायता प्राप्त प्रबंधक महासभा

“पूर्व में इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है, अभी प्रक्रिया पाइपलाइन में है।”
डॉ. महेंद्र देव, पूर्व निदेशक, माध्यमिक शिक्षा विभाग

वर्तमान शुल्क संरचना पिछले 16 वर्षों से लागू है। महंगाई में लगातार वृद्धि हुई है, लेकिन कॉलेजों के शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया। वहीं दूसरी ओर माध्यमिक शिक्षा परिषद की फीस में लगातार वृद्धि हुई है। वर्ष 2010 में यूपी बोर्ड की फॉर्म फीस 60 रुपये थी, जो बढ़कर अब 600 रुपये तक पहुंच गई है। (संवाद)

Basic Shiksha Khabar | PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News | Primarykamaster | Updatemarts | Primary Ka Master | Basic Shiksha News | Uptet News | primarykamaster | SHIKSHAMITRA

Leave a Comment