₹5 लाख कैशलेस चिकित्सा सुविधा, नई भर्तियां और निपुण लक्ष्य विस्तार पर ACS का बड़ा बयान: बताईं नई सत्र की 7 बड़ी प्राथमिकताएं, इस वार्ता के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं: – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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उत्तर प्रदेश के बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव, आदरणीय श्री पार्थ सारथी सेन शर्मा जी और सहायक शिक्षिका डॉ. प्रज्ञा त्रिवेदी के बीच मुख्य रूप से नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत, शिक्षक और छात्र कल्याण तथा शिक्षा व्यवस्था के सुधार को लेकर वार्ता हुई है। 

इस वार्ता के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

​1. 25 जून से विद्यालयों की शुरुआत और तैयारियां

​25 जून से पठन-पाठन पुनः प्रारंभ हो रहा है। शिक्षकों को निर्देश दिए गए थे कि वे 21 जून (अंतरराष्ट्रीय योग दिवस) के बाद 22, 23 और 24 जून को विद्यालय आकर साफ़-सफाई, पीएम पोषण (मिड-डे मील), ब्लैक बोर्ड, चॉक-डस्टर, अटेंडेंस रजिस्टर, पाठ्य पुस्तकें और शिक्षक संदर्शिकाएं आदि व्यवस्थित कर लें।

​गर्मी को देखते हुए बच्चों को लगातार हाइड्रेटेड रखने, पानी पिलाने और सुबह 10:00 बजे के बाद कोई भी आउटडोर स्पोर्ट्स एक्टिविटी न कराने की हिदायत दी गई है।

​भविष्य में भी ग्रीष्मावकाश के बाद स्कूल खुलने की तिथि 25 जून ही नियत रहेगी,

ताकि अनिश्चितता न रहे। आरटीई (RTE) एक्ट के तहत शैक्षिक सत्र में कम से कम 220 दिन की पढ़ाई सुनिश्चित करनी होगी.

​2. स्कूल चलो अभियान (फेज-2)

​स्कूल चलो अभियान का फेज-2 1 जुलाई से 15 जुलाई तक चलेगा।

​शत्-प्रतिशत नामांकन के लिए गांव की आशा बहू के रिकॉर्ड से 3+ (बाल वाटिका के लिए) और 6+ (कक्षा 1 के लिए) आयु के बच्चों को चिन्हित कर उनके अभिभावकों से संवाद करने को कहा गया है।

​बच्चों के ड्रॉप-आउट को रोकने के लिए ‘ट्रांजिशन’ पर ध्यान दिया जाएगा। 

कक्षा 5 के शिक्षक की जिम्मेदारी होगी कि बच्चा कक्षा 6 में जाए, इसी प्रकार कक्षा 8 के शिक्षक की जिम्मेदारी कक्षा 9 के लिए और कक्षा 10 के शिक्षक की जिम्मेदारी कक्षा 11 या वोकेशनल कोर्स में बच्चे के प्रवेश के लिए होगी.

​3. कक्षा-कक्ष अभ्यास और प्राथमिकताएं

​नियमित उपस्थिति (Regular Attendance): बच्चों की लगातार गैर-हाजिरी पर उनके अभिभावकों को फोन कर स्कूल भेजने के लिए प्रेरित किया जाए.

​कैचअप ट्रेनिंग (रेमेडियल टीचिंग): जो बच्चे सीखने के स्तर में पीछे रह गए हैं, उन पर विशेष ध्यान देकर बाकियों के स्तर तक लाया जाए.

​मुक्त वातावरण: अनुशासन के नाम पर भय का माहौल न बनाकर ऐसा फ्रेंडली वातावरण बनाया जाए जहां बच्चे खुलकर अपनी बात कह सकें।

​होलिस्टिक प्रोग्रेस रिपोर्ट कार्ड (HPC): अभिभावकों को शामिल करने के लिए साल में दो बार (सितंबर और अप्रैल) एचपीसी भरकर उनसे साझा किया जाएगा।

​रीडिंग हैबिट: बच्चों को लाइब्रेरी की किताबें घर ले जाने की छूट दी जाए। हफ्ते में कम से कम आधा या एक घंटा ‘Drop Everything and Read’ (सब छोड़कर सिर्फ पढ़ें) नियम लागू हो, जिसमें शिक्षक भी स्वयं पढ़ें।

​4. निपुण भारत मिशन का विस्तार 

​उत्तर प्रदेश में अब निपुण लक्ष्य का विस्तार कक्षा 1 से 5 तक के लिए किया जा रहा है।

​कक्षा 3, 4 और 5 के लिए गणित, हिंदी और अंग्रेजी के सरल लक्ष्य निर्धारित किए जा रहे हैं। 

इसके लिए एसआरजी (SRG) और एआरपी (ARP) की ट्रेनिंग भी शुरू की गई है.

​शिक्षा संकुल बैठकें: इन बैठकों को प्रभावी बनाकर उन शिक्षकों को मंच दिया जाए जिन्होंने किसी कठिन पाठ्य बिंदु (जैसे- फ्रैक्शन या लिखावट) को टीएलएम (TLM) के माध्यम से सबसे अच्छे तरीके से सिखाया हो

​5. बाल वाटिका एवं समुदाय का जुड़वाव

​स्कूल को समाज से जोड़ने के लिए ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और स्थानीय समुदाय (जैसे सीतापुर और सहारनपुर के उदाहरण) का सहयोग लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने पर जोर दिया गया,

​बाल वाटिका (को-लोकेटेड आंगनबाड़ी) में आंगनबाड़ी कार्यकत्री, सहायिका, आशा और शिक्षक मिलकर एक टीम की तरह काम करें।

​6. शिक्षक कल्याण और नई भर्तियां

​माननीय मुख्यमंत्री जी की पहल से शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) के शिक्षकों के लिए ₹5 लाख तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रारंभ की गई है, जिसके लिए सभी को परिवार सहित पोर्टल पर पंजीकरण कराने को कहा गया है।

​नगरीय क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए 11,000 नए शिक्षकों और 10,000 नए अनुदेशकों की भर्ती की प्रक्रिया (अधियाचन) भेजी गई है।

​7. साहित्य और समय प्रबंधन पर व्यक्तिगत विचार

​अपर मुख्य सचिव जी ने अपनी व्यस्त दिनचर्या में से लेखन के लिए समय निकालने के सवाल पर ‘मुंशी प्रेमचंद’ और ‘रवींद्रनाथ टैगोर’ से प्रेरणा लेने की बात कही.

​उन्होंने शिक्षकों (विशेषकर महिला शिक्षकों) को अपनी व्यस्तता में से स्वयं के स्वास्थ्य, योग और पढ़ने-लिखने के लिए थोड़ा समय निकालने का संदेश दिया, क्योंकि अच्छा लिखने के लिए निरंतर पढ़ना बेहद जरूरी है.

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