5 लाख की कैशलेस चिकित्सा, मानदेय वृद्धि और 21 हजार नई भर्तियों की घोषणा से शिक्षकों में उत्साह – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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*यूट्यूब लाइव संवाद, एसीएस पार्थ सारथी सेन शर्मा ने दिया ‘शिक्षक सर्वोपरि’ का मंत्र*  

*’कक्षा-कक्ष ही परिवर्तन की प्रयोगशाला, शिक्षक की निष्ठा से ही सफल होगा निपुण भारत मिशन’*  

*5 लाख की कैशलेस चिकित्सा, मानदेय वृद्धि और 21 हजार नई भर्तियों की घोषणा से शिक्षकों में उत्साह*  

*लखनऊ, 22 जून 2026।*

उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार करते हुए अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने मंगलवार को यूट्यूब लाइव सेशन के माध्यम से प्रदेश के लाखों शिक्षकों से सीधा संवाद किया। इस संवाद में परिषदीय विद्यालयों के प्रधानाध्यापक, सहायक अध्यापक, शिक्षा मित्र, अनुदेशक, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के शिक्षक तथा शिक्षा विभाग से जुड़े हजारों कार्मिक शामिल हुए।  

अपने संबोधन की शुरुआत में अपर मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन का सबसे बड़ा आधार शिक्षक हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल भवन, फर्नीचर या स्मार्ट क्लास बनाना नहीं है। असली लक्ष्य हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना है। इसके लिए विद्यालयों में सीखने का सकारात्मक वातावरण बनाना और प्रत्येक बच्चे की सीखने की क्षमता को पहचानकर उसे विकसित करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।  

उन्होंने कहा कि शिक्षा की पूरी व्यवस्था का केंद्रबिंदु कक्षा-कक्ष है। यहीं पर बच्चे का ज्ञान, व्यक्तित्व, सामाजिक व्यवहार और भविष्य आकार लेता है। शासन स्तर पर कितनी भी योजनाएं बना ली जाएं, कितनी भी निगरानी कर ली जाए, लेकिन जमीनी परिवर्तन केवल शिक्षक के माध्यम से ही संभव है। इसलिए शिक्षा सुधार में शिक्षक की भूमिका सर्वोपरि है।  

अपर मुख्य सचिव ने तीन से छह वर्ष की आयु को बच्चों के मस्तिष्क विकास का ‘गोल्डन पीरियड’ बताया। उन्होंने कहा कि यदि इस आयु में बच्चों को उचित पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और सकारात्मक वातावरण मिले तो आगे चलकर उनकी सीखने की क्षमता कई गुना बढ़ जाती है। उन्होंने ‘ग्राम स्तरीय टीम’ का मॉडल प्रस्तुत करते हुए कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा बहू, एएनएम, शिक्षक और ग्राम प्रधान यदि एक टीम के रूप में काम करें तो विद्यालयों की स्थिति और बच्चों का शैक्षिक स्तर दोनों में क्रांतिकारी सुधार आएगा। यह समन्वय ग्रामीण शिक्षा के लिए गेमचेंजर साबित होगा।  

शिक्षकों के हितों पर विस्तार से बोलते हुए अपर मुख्य सचिव ने कई बड़ी घोषणाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शिक्षकों एवं उनके परिवारों के लिए पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा शुरू की गई है। इस योजना का दायरा बढ़ाते हुए इसमें सहायक अध्यापकों के साथ शिक्षा मित्र, अनुदेशक तथा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के शिक्षकों को भी शामिल किया गया है। उन्होंने सभी शिक्षकों से अपील की कि वे स्वयं और अपने परिवार का पंजीकरण अवश्य करा लें। यह योजना न केवल आर्थिक सुरक्षा देती है बल्कि परिवार को मानसिक संतोष भी प्रदान करती है।  

इसके अलावा उन्होंने बताया कि सरकार शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि कर चुकी है। लंबे समय से रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। नगरीय क्षेत्रों में लगभग 11 हजार शिक्षकों तथा 10 हजार अनुदेशकों की भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इससे विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर होगी और मौजूदा शिक्षकों पर काम का दबाव कम होगा।  

  

शिक्षकों को उनके दायित्व का बोध कराते हुए अपर मुख्य सचिव ने कहा कि हर शिक्षक को यह याद रखना चाहिए कि उसने शिक्षा का क्षेत्र केवल नौकरी के लिए नहीं चुना है। यह समाज और राष्ट्र निर्माण का पवित्र मिशन है। उन्होंने आह्वान किया कि शिक्षक अपने विद्यालय और अपने बच्चों के प्रति पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करें। उन्होंने कहा कि जब शिक्षक पूरी ईमानदारी और लगन से कक्षा में पढ़ाएगा, तभी निपुण भारत मिशन का 2026-27 तक हर बच्चे को निपुण बनाने का लक्ष्य हासिल होगा। शिक्षा की सभी योजनाओं की सफलता का आधार शिक्षक की कक्षा में मौजूदगी और उसकी प्रतिबद्धता है।  

संवाद के दौरान जब उनसे व्यस्त प्रशासनिक जीवन में साहित्य सृजन के लिए समय निकालने का रहस्य पूछा गया तो उन्होंने विनम्रता से कहा कि वे स्वयं को बड़ा लेखक नहीं मानते। वे महान साहित्यकारों से प्रेरणा लेने का प्रयास करते हैं। उन्होंने गर्व से कहा कि उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग के लिए यह गौरव की बात है कि मुंशी प्रेमचंद भी शिक्षा विभाग से जुड़े रहे। उन्होंने कहा कि नियमित अध्ययन ही अच्छे लेखन की पहली शर्त है। जो व्यक्ति पढ़ता नहीं, वह अच्छा लिख भी नहीं सकता। शिक्षकों को सलाह दी कि वे कितनी भी व्यस्त दिनचर्या में हों, प्रतिदिन कुछ समय स्वयं के लिए जरूर निकालें। नियमित पुस्तक पढ़ें, लेखन करें, योग या व्यायाम करें और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें।  

विशेष रूप से महिला शिक्षकों की दोहरी जिम्मेदारी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि घर और विद्यालय दोनों को संभालने के बावजूद स्वयं के लिए समय निकालना जरूरी है। एक स्वस्थ, तनावमुक्त और सकारात्मक शिक्षक ही बच्चों को बेहतर शिक्षा और संस्कार दे सकता है। उन्होंने रवीन्द्रनाथ टैगोर और आशापूर्णा देवी का उदाहरण देते हुए कहा कि मनुष्य की क्षमता असीमित है। सकारात्मक दृष्टिकोण हो तो कोई भी व्यक्ति एक साथ कई क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर सकता है।  

अपने समापन संबोधन में अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने प्रदेश के सभी प्रधानाध्यापकों, सहायक अध्यापकों, शिक्षा मित्रों, अनुदेशकों तथा शिक्षा जगत से जुड़े सभी कर्मियों को नए शैक्षणिक सत्र की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षकों की मेहनत, समर्पण और सकारात्मक सोच के बल पर उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था देश में एक नई पहचान स्थापित करेगी। प्रदेश का हर बच्चा निपुण बनेगा और अपनी क्षमता के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करेगा।

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