UPPSC: 598 परीक्षाओं की CBI जांच 2018 से जारी, नौ साल में नतीजा अब भी नहीं
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की अप्रैल 2012 से मार्च 2017 तक आयोजित 598 भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच करीब नौ साल से जारी है, लेकिन अब तक जांच का कोई ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आया है। जांच के दौरान 10 हजार से अधिक अभ्यर्थियों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं और दो एफआईआर भी दर्ज हुई हैं।
2018 में शुरू हुई थी जांच
झारखंड में जेएनयू के आंदोलन के बाद कई भर्ती परीक्षाएं निरस्त किए जाने के बीच उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच शुरू हुई थी। जनवरी 2018 में भर्ती परीक्षाओं की जांच के लिए सीबीआई ने UPPSC परिसर में अपना पहला कदम रखा था।
शुरुआत में आयोग के तत्कालीन कर्मचारियों और अधिकारियों की ओर से जांच का विरोध किया गया और मामला कोर्ट तक पहुंचा। न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद जांच आगे बढ़ी।
10 हजार से ज्यादा अभ्यर्थियों के बयान
सीबीआई ने अप्रैल 2012 से मार्च 2017 तक हुई 598 परीक्षाओं से जुड़े मामलों की जांच की। इस दौरान 10 हजार से अधिक अभ्यर्थियों के बयान दर्ज किए गए। कुछ लोगों को नामजद भी किया गया और धांधली की आशंका में दो एफआईआर दर्ज हुईं।
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान आयोग की भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली बड़ा मुद्दा बनी थी। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के बैनर तले प्रदेश में व्यापक आंदोलन भी हुआ था।
कई परीक्षाओं में टॉपर्स से भी पूछताछ
सीबीआई ने विभिन्न परीक्षाओं में चयनित टॉपर्स के भी बयान दर्ज किए हैं। चयन में धांधली के आरोपों के कारण इन अभ्यर्थियों से पूछताछ की गई। हालांकि, जांच की गति धीमी होने से प्रतियोगी छात्रों में नाराजगी बनी हुई है।
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष अवनीश पांडेय ने मामले में कोर्ट में याचिका दाखिल कर सीबीआई से प्रत्येक माह जांच की प्रगति रिपोर्ट देने और एसआईटी गठित करने की मांग की थी।
जांच में तेजी की मांग
अवनीश पांडेय का आरोप है कि सीबीआई जांच और सरकार की कार्रवाई के बीच लंबे समय से स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है, जिससे प्रतियोगी छात्रों में निराशा बढ़ी है। छात्रों की मांग है कि जांच को जल्द पूरा कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए और भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
598 परीक्षाओं की जांच का मामला अब भी लंबित रहने से प्रतियोगी छात्रों के बीच यह सवाल बना हुआ है कि करीब नौ साल बाद इस जांच का अंतिम निष्कर्ष कब सामने आएगा।
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