प्रतापगढ़। परिषदीय विद्यालयों में अब बच्चों को केवल किताबों तक सीमित शिक्षा नहीं दी जाएगी, बल्कि प्रयोगों के माध्यम से विज्ञान को व्यवहारिक रूप से समझाया जाएगा। जिले के 23 से अधिक परिषदीय विद्यालयों में विज्ञान शिक्षा को आधुनिक और रोचक बनाने के लिए विज्ञान किट उपलब्ध कराई जा रही हैं।
सरकार का उद्देश्य ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी आधुनिक एवं प्रयोग आधारित शिक्षा से जोड़ना है, ताकि उनमें वैज्ञानिक सोच, जिज्ञासा और नवाचार की क्षमता विकसित हो सके।
विज्ञान किट से बच्चों में बढ़ेगी जिज्ञासा और नवाचार क्षमता
बीएसए भूपेंद्र सिंह ने बताया कि अब सरकारी स्कूलों के बच्चों को केवल सैद्धांतिक पढ़ाई तक सीमित नहीं रखा जाएगा। विज्ञान किट के माध्यम से बच्चों को प्रयोगात्मक शिक्षा दी जाएगी, जिससे पढ़ाई अधिक रोचक और प्रभावी बनेगी।
उन्होंने कहा कि सरकार पहले से ही मिशन प्रेरणा, निपुण भारत मिशन, स्कूल कायाकल्प, स्मार्ट क्लास और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसी योजनाओं के जरिए शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने का प्रयास कर रही है। अब विज्ञान किट की उपलब्धता से विज्ञान शिक्षा को और अधिक छात्र केंद्रित तथा व्यावहारिक बनाया जा सकेगा।
प्रयोग आधारित शिक्षा से बढ़ेगा बच्चों का आत्मविश्वास
शिक्षकों का मानना है कि प्रयोग आधारित शिक्षा से बच्चों में सीखने की रुचि बढ़ेगी और वे विज्ञान के सिद्धांतों को आसानी से समझ पाएंगे। इससे विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के बेहतर अवसर मिलेंगे और भविष्य में विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी मिलेगी।
ग्रामीण छात्रों को मिलेगा आधुनिक शिक्षा का लाभ
विज्ञान किट योजना का सबसे बड़ा फायदा ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को मिलेगा, जहां संसाधनों की कमी के कारण प्रयोगात्मक शिक्षा सीमित रह जाती थी। अब छात्र स्वयं प्रयोग कर विज्ञान को समझ सकेंगे, जिससे उनकी तार्किक क्षमता और रचनात्मक सोच को मजबूती मिलेगी।
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