आज सुप्रीम कोर्ट में तैय्यब सलमानी के नाम से दायर एसएलपी पर सुनवाई हुई, जिसे डिवीजन बेंच के समक्ष पुनः विचारार्थ भेज दिया गया है। साथ ही, एक और एसएलपी जानबूझकर सूचीबद्ध नहीं करवाई जा रही है, क्योंकि याचिकाकर्ता जानते हैं कि वह भी डिवीजन बेंच के लिए ही भेजी जाएगी।
असल में, जब तक डिवीजन बेंच का निर्णय नहीं आता, तब तक सुप्रीम कोर्ट में ऐसी याचिकाओं का कोई ठोस औचित्य नहीं बनता। यह सब केवल एक पब्लिसिटी स्टंट बनकर रह गया है, जो शिक्षा और विशेषकर उत्तर प्रदेश के नौनिहालों के भविष्य के लिए घातक है।
दुखद यह है कि इस तरह की गतिविधियों में कोई बाहरी संस्था नहीं, बल्कि खुद कुछ शिक्षक शामिल हैं, जो न सिर्फ कानून की प्रक्रिया की अनदेखी कर रहे हैं, बल्कि आम शिक्षकों को भी भ्रमित कर रहे हैं। इनके पास न तो सिंगल बेंच का आदेश है और न ही स्पष्ट रणनीति।
मैं पहले से कहता आ रहा हूं कि लखनऊ बेंच की एकल पीठ का निर्णय ही आधार है, और विधिसम्मत तरीके से पहले डिवीजन बेंच जाना होगा। वहीं से जो निर्णय आएगा, उसी के आधार पर सुप्रीम कोर्ट की वैधता तय होगी।
आज “नितेश कुमार” नाम से दायर याचिका डिवीजन बेंच में सुनवाई हेतु सूचीबद्ध है, जिसकी सुनवाई फ्रेश केस के बाद होगी।
कुल मिलाकर तीन कोर्ट में यह मामला चल रहा है, जिसकी हर जानकारी आपको समय पर दी जाएगी।
सावधान रहें, सतर्क रहें।
#rana
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