लखनऊ। अंग्रेजी मीडिएम प्राइमरी स्कूल (कम्पोजिट स्कूल) के बच्चों ने साल भर पढ़ाई की हिन्दी मीडियम की किताबों से। शिक्षक भी साल भर बच्चों को निपुण बनाने के लिये हिन्दी में पढ़ाते रहे। अब वार्षिक परीक्षा में प्रश्न पत्र अंग्रेजी में मिलने पर बच्चे चकरा गए। कक्षा दो में गणित के प्रश्न पत्र के सवाल हल करना तो दूर बच्चे सवाल ही नहीं पढ़ पाए। शिक्षकों ने बोर्ड हिन्दी में सवाल लिखकर परीक्षा करायी। यही हाल कक्षा सात व आठ में विज्ञान विषय की परीक्षा में हुआ। सोमवार से प्राइमरी स्कूलों में वार्षिक परीक्षाएं शुरू हुई हैं।
वर्ष 2018-19 में लखनऊ के 18 अपर प्राइमरी स्कूल और करीब 100 प्राइमरी स्कूलों को अंग्रेजी मीडियम में तब्दील किया गया था। इन स्कूलों में दूसरे स्कूलों से विषय वार योग्य शिक्षकों के तबादले करके तैनाती दी गई। ताकि प्राइमरी स्कूलों के बच्चे भी कॉन्वेंट की तरह अंग्रेजी मीडियम में पढ़ाई कर सकें। साथ ही फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने में दक्ष बन सकें। अंग्रेजी मीडियम की किताबें भी छापकर स्कूलों को भेजी गई, लेकिन यहां पढ़ने वाले बच्चे अंग्रेजी की किताबें पढ़ना तो दूर अल्फाबेट व चीजों के नाम अंग्रेजी में नहीं बोल पाते हैं। शिक्षकों ने बताया कि अंग्रेजी मीडियम की किताबें सभी नहीं स्कूलों में नहीं मिलीं। बच्चे अंग्रेजी में पढ़-लिख नहीं पाते हैं। इसलिये हिन्दी की किताबों से पढ़ाया जाता है। बीएसए से फोन पर संपर्क की कोशिश की पर उन्होंने जवाब नहीं दिया।
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