लखनऊ। सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध न कराने के मामले में उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग ने माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर निदेशक, प्रयागराज के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने संबंधित अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है।
आयोग ने पूछा है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सूचना उपलब्ध न कराने पर उनके खिलाफ आर्थिक दंड की कार्रवाई क्यों न की जाए। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो संबंधित अधिकारी पर 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
सूचना आयोग की इस कार्रवाई को आरटीआई कानून के प्रभावी अनुपालन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आयोग ने यह भी संकेत दिया है कि सूचना देने में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ भविष्य में भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से सरकारी विभागों में पारदर्शिता बढ़ेगी और आम नागरिकों को समय पर सूचना उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत होगी।
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