लखनऊ। उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग में वर्ष 2016 में हुई डार्क रूम सहायक भर्ती को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा 355 पदों पर की गई भर्ती में कई ऐसे मामले उजागर हुए हैं, जहां एक ही नाम और मिलते-जुलते विवरण वाले लोगों को अलग-अलग जिलों में नौकरी मिल गई।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2015 में आयोग ने 355 पदों के लिए आवेदन मांगे थे। भर्ती प्रक्रिया में 90 अंकों की लिखित परीक्षा और 10 अंकों का साक्षात्कार शामिल था। परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद चयनित अभ्यर्थियों की सूची स्वास्थ्य महानिदेशालय को भेजी गई थी।
मानव संपदा पोर्टल से खुली पोल
भर्ती में गड़बड़ी का मामला तब सामने आया जब मानव संपदा पोर्टल पर कर्मचारियों के विवरण का मिलान किया गया। जांच में पता चला कि एक ही नाम, समान पिता के नाम और अलग-अलग जिलों में तैनाती वाले कई रिकॉर्ड मौजूद हैं।
केस-2 में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य
- अंशुल कुमार नाम से चार अलग-अलग नियुक्तियां मिलीं
- अलग-अलग जिलों — अमेठी, बदायूं, इटावा और हाथरस में तैनाती दर्शाई गई
- पिता के नाम में मामूली बदलाव के साथ रिकॉर्ड दर्ज मिले
केस-3 में भी समान स्थिति
- मनोज सिंह नाम से तीन नियुक्तियां सामने आईं
- कानपुर देहात, लखनऊ और संत कबीर नगर में तैनाती दर्ज
- पिता के नाम में भी लगभग समानता पाई गई
337 की जगह 500 से अधिक लोगों के नौकरी करने की आशंका
रिपोर्ट के मुताबिक, 355 पदों के सापेक्ष 337 नियुक्तियां की गई थीं, लेकिन विस्तृत जांच होने पर प्रदेश में 500 से अधिक लोगों के नौकरी करने की आशंका जताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि 16 जून 2016 को तत्कालीन महानिदेशक सुनील श्रीवास्तव और निदेशक पैरामेडिकल एससी त्रिपाठी के हस्ताक्षर से 272 लोगों की सूची जारी हुई थी। इसके बाद 15 जुलाई 2016 को 65 अन्य लोगों की सूची जारी की गई थी।
अब मामले के उजागर होने के बाद विभागीय जांच और कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई गई तो बड़ा घोटाला सामने आ सकता है।
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