प्रयागराज, । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद और जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों में कार्यरत प्रवक्ताओं की वरिष्ठता सूची के तय करने में हो रही देरी को गंभीरता से लेते हुए कहा कि राज्य सरकार कोर्ट के पिछले आदेशों का पालन करने में पूरी तरह विफल रही है और मूकदर्शक बनी रही।
कोर्ट ने इस लापरवाही पर पहले सरकार पर पांच लाख रुपये का हर्जाना लगाया, जिसे बाद में घायल महिला अधिवक्ता के इलाज के लिए सहायता राशि देने के आश्वासन पर माफ कर दिया। Xयह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने राजीव कुमार ब अन्य की याचिका पर दिया। Xवर्ष 2014 के विज्ञापन संख्या 05/2013-14 के तहत यूपी लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित प्रवक्ताओं की अंतःवरिष्ठता से जुड़े मामले के तथ्यों के अनुसार इन प्रवक्ताओं का चयन एक ही भर्ती प्रक्रिया से हुआ था लेकिन अलग-अलग विषयों के परिणाम और नियुक्तियां वर्ष 2017 से 2021 के बीच अलग-अलग तिथियों पर हुईं। Xइससे पहले एक खंडपीठ ने 29 अप्रैल 2025 को आदेश दिया था कि राज्य सरकार को सबसे पहले यह तय करना होगा कि वरिष्ठता सूची विषयवार बनेगी या फिर सभी विषयों को मिलाकर एक एकल कैडर के रूप में तैयार की जाएगी। कोर्ट ने पाया कि नियुक्ति प्राधिकारी ने लोक सेवा आयोग द्वारा भेजी गई विषयवार सूची को ही बिना सोचे-समझे अंतिम वरिष्ठता सूची के रूप में जारी कर दिया।
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