दूरस्थ तैनाती से परेशान शिक्षक ने उठाई ऑनलाइन कक्षाओं की मांग, ईंधन बचत का दिया तर्क – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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लखनऊ।
प्रदेश में लगातार बढ़ती गर्मी और ईंधन बचत को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच एक शिक्षक ने ऑनलाइन कक्षाओं को समय की आवश्यकता बताते हुए महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि दूरस्थ विद्यालयों में तैनात हजारों शिक्षक प्रतिदिन लंबी दूरी तय करने को मजबूर हैं, जिससे न केवल उनका समय और धन खर्च होता है बल्कि उनकी कार्यक्षमता पर भी प्रभाव पड़ता है।

शिक्षक नेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता अनुराग सिंह ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पिछले साढ़े दस वर्षों की सेवा के दौरान वह अपने विद्यालय तक आने-जाने के लिए लगभग 3.52 लाख किलोमीटर की यात्रा कर चुके हैं। इस दौरान करीब 17.64 लाख रुपये का खर्च तथा लगभग 17,640 लीटर ईंधन की खपत हुई है।

उन्होंने कहा कि यह स्थिति केवल उनकी नहीं बल्कि प्रदेश के हजारों शिक्षकों की है, जो अपने घरों से 40 से 100 किलोमीटर दूर विद्यालयों में तैनात हैं। कई बार स्थानीय स्तर पर रिक्त पद उपलब्ध होने के बावजूद शिक्षकों को दूरस्थ विद्यालय आवंटित कर दिए जाते हैं।

ईंधन बचत का रखा तर्क

अनुराग सिंह का दावा है कि यदि प्रदेश के लगभग 5 लाख बेसिक शिक्षकों को अस्थायी रूप से ऑनलाइन शिक्षण की अनुमति दी जाए तो प्रतिदिन लाखों लीटर ईंधन की बचत हो सकती है।

उनके अनुसार यदि प्रत्येक शिक्षक औसतन 40 किलोमीटर की दूरी तय करता है, तो ऑनलाइन शिक्षण व्यवस्था लागू होने पर प्रतिदिन लगभग 15 से 20 लाख लीटर ईंधन की बचत संभव है। यहां तक कि यदि शिक्षक बाइक अथवा सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते हों, तब भी प्रतिदिन लगभग 10 लाख लीटर ईंधन बचाया जा सकता है।

तैनाती व्यवस्था पर भी उठाए सवाल

उन्होंने कहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा में बेहतर अंक प्राप्त करने के बावजूद कई शिक्षकों को अपने घरों से काफी दूर नियुक्ति दी गई है, जबकि कम अंक पाने वाले कई अभ्यर्थियों को घर के निकट विद्यालय मिल गए। इससे शिक्षकों में असंतोष की भावना भी देखने को मिलती है।

सामान्य स्थिति तक ऑनलाइन पढ़ाई का सुझाव

अनुराग सिंह का मानना है कि जब तक मौसम और अन्य परिस्थितियां पूरी तरह सामान्य नहीं हो जातीं, तब तक ऑनलाइन शिक्षण व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित नहीं होगी और ईंधन की बड़ी मात्रा में बचत भी होगी।

हालांकि ऑनलाइन कक्षाओं को लेकर अभी तक सरकार या शिक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है। फिर भी शिक्षक वर्ग में दूरस्थ तैनाती, ईंधन खर्च और ऑनलाइन शिक्षण को लेकर बहस तेज होती दिखाई दे रही है।

“देश सर्वोपरि है। यदि ऑनलाइन शिक्षण से लाखों लीटर ईंधन की बचत होती है, तो इस विकल्प पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।”
— अनुराग सिंह

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