राष्ट्रीय पेंशन योजना में अब सुनिश्चित लाभ की तैयारी
पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। इसमें निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भविष्य में न्यूनतम सुनिश्चित पेंशन योजना शुरू की जा सकती है। प्राधिकरण इस दिशा में गंभीरता से काम कर रहा है।
पीएफआरडीए के अध्यक्ष एस. रमन ने संकेत दिए हैं कि निजी क्षेत्र के लिए ‘यूनिफाइड पेंशन स्कीम’ (यूपीएस) जैसी योजना लाने का विकल्प खुला हुआ है। इसकी संभावना तलाशी जा रही है। ऐसी योजना लागू करने के लिए जोखिम व रिटर्न के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
उन्होंने कहा कि अगर किसी योजना में निश्चित पेंशन या सुनिश्चित रिटर्न देना है, तो उसकी गारंटी किसी संस्था को लेनी होगी। उदाहरण के तौर पर अटल पेंशन योजना में सरकार तय पेंशन की गारंटी देती है और जरूरत पड़ने पर उसका खर्च भी वहन करती है। ऐसे में अगर भविष्य में एनपीएस में भी कोई सुनिश्चित पेंशन की योजना लागू की जाती है तो उसके लिए या तो सरकार को आर्थिक सहयोग देना होगा, कर्मचारियों का योगदान बढ़ाना होगा या फिर रिटर्न की उम्मीदों को थोड़ा कम करना पड़ेगा।
पारंपरिक पेंशन योजनाओं के मुकाबले एनपीएस पूरी तरह बाजार से जुड़ा हुआ है यानी इसमें मिलने वाले रिटर्न की कोई तय गारंटी नहीं होती। यही वजह है कि नौकरीपेशा लोग लंबे समय से ऐसी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, जिसमें सेवानिवृत्ति के बाद तय पेंशन मिल सके। पीएफआरडीए केवल सुनिश्चित पेंशन योजना पर ही नहीं, बल्कि एनपीएस निवेशकों को बेहतर और स्थिर रिटर्न देने के लिए नए निवेश विकल्पों पर भी काम कर रहा है।
तेजी से बढ़ रहा एनपीएस का दायरा
पीएफआरडीए के अनुसार, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। चालू वित्त वर्ष में एनपीएस ग्राहकों की संख्या 22 फीसदी से अधिक बढ़ने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक एनपीएस से जुड़े कुल ग्राहकों की संख्या 2.17 करोड़ तक पहुंच चुकी है, जबकि कुल पेंशन कोष बढ़कर 15.95 लाख करोड़ रुपये हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि निजी क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी हैं, जिनके पास रिटायरमेंट के बाद नियमित आय की मजबूत व्यवस्था नहीं होती। ऐसे में गारंटीड पेंशन योजना आने से करोड़ों लोगों को सामाजिक सुरक्षा मिल सकती है।
वर्तमान में अभी एनपीएस का पैसा ज्यादातर इक्विटी, कॉर्पोरेट बॉन्ड, सरकारी बॉन्ड और कुछ वैकल्पिक निवेश फंडों में लगाया जाता है। वहीं, दुनिया के बड़े पेंशन फंड्स अब इन्फ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट से जुड़े निवेश और प्राइवेट डेट जैसे विकल्पों में भी पैसा लगा रहे हैं।
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