प्रयागराज, । राजकीय शिक्षकों के समायोजन में प्रधानाचार्यों की हरी झंडी अड़चन बनी हुई है। प्रवक्ता और एलटी ग्रेड शिक्षकों ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक को पत्र लिखकर समायोजन/स्थानांतरण नीति 2026-27 की विसंगतियों को दूर करने की मांग की है। शिक्षकों का कहना है कि राजकीय स्कूलों के प्रधानाचार्य स्थानांतरण आवेदन फॉर्म पर अपने स्कूल के शिक्षकों के जाने से शिक्षण कार्य प्रभावित होने की टिप्पणी कर दे रहे हैं। कुछ जिलों के जिला विद्यालय निरीक्षक भी प्रधानाचार्यों से ऐसी टिप्पणी करवा रहे हैं। इससे अधिकांश शिक्षक ट्रांसफर से वंचित हो रहे हैं।
2024-25 एवं 2025-26 सत्र के स्थानांतरण में मानव सम्पदा पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन, ट्रैकिंग एवं पारदर्शी प्रक्रिया थी जबकि वर्तमान नीति में ऑफलाइन आवेदन एवं ई-मेल आधारित प्रक्रिया अपनाई गई है। शिक्षक यह भी नहीं जान पाते कि उसका आवेदन डीआईओएस ने अग्रसारित किया है या नहीं। शिक्षकों ने मांग की है कि 20 नवम्बर 1976 के शासनादेश में निर्धारित मानकों का वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार पुनरीक्षण कराया जाए। डीआईओएस के लिए आवेदन अग्रसारित करने के स्पष्ट एवं एकरूप मानदंड निर्धारित हो। प्रधानाचार्य की ‘शिक्षण कार्य प्रभावित होगा’ जैसी सामान्य टिप्पणी को स्थानांतरण निरस्त करने का एकमात्र आधार न बनाया जाए।
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