बच्चों को चिकोटी भी नहीं काट सकेंगे गुरुजी, बेसिक शिक्षा विभाग ने स्कूलों में दंड पर प्रतिबंध का सख्ती से पालन के दिए निर्देश,यह भी किया गया है प्रतिबंधित – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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लखनऊ। प्रदेश के निजी व सरकारी विद्यालयों में गुरुजी अब न तो बच्चों को फटकारेंगे, न पीटेंगे और न ही चिकोटी काट सकेंगे। बेसिक शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार के शारीरिक व मानसिक दंड न देने के निर्देश का सख्ती से पालन कराने का निर्देश दिया गया है।

विभाग ने राष्ट्रीय बालक अधिकार संरक्षण आयोग के निर्देश का हवाला देते हुए कहा है कि इसका व्यापक प्रचार प्रसार किया जाए। वहीं बच्चों को भी बताएं कि वे इसके विरोध में अपनी बात कह सकते हैं। इसे संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में लाएं। महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने सभी

बीएसए को निर्देश दिया कि हर स्कूल जिसमें छात्रावास हैं, जेजे होम्स, बाल संरक्षण गृह भी शामिल हैं, में एक ऐसी व्यवस्था की जाए, जहां बच्चे अपनी बात रख सकें।

ऐसे संस्थानों में एनजीओ की मदद ली जा सकती है। हर स्कूल में एक शिकायत पेटिका भी होनी चाहिए, जहां छात्र शिकायत दे सकें।

टोल फ्री नंबर पर करें शिकायत विद्यालयों में पढ़ाई संबंधी और

बच्चों व अभिभावकों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए निशुल्क टोल फ्री नंबर 1800-889-3277 शुरू किया गया है। यह नंबर सभी विद्यालयों के नोटिस बोर्ड व मुख्य प्रवेश द्वार पर लिखे जाएंगे। महानिदेशक ने कहा है कि इस पर आने वाली शिकायतों का निस्तारण व सुझावों की मॉनिटरिंग कर कार्यवाही की जाए।

अभिभावक शिक्षक समिति शिकायतों की समीक्षा करें। फिर इन शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की जाए।

उन्होंने कहा है कि शिक्षा विभाग ब्लॉक, जिला व राज्य स्तर पर ऐसी व्यवस्था करें कि बच्चों की शिकायत व कार्रवाई की समीक्षा की जा सके। आरटीई के नियमों का अनुपालन कराते हुए किसी बच्चे को न तो

शारीरिक दंड दिया जाएगा और न ही व उसका मानसिक उत्पीड़न किया जाएगा। इसका उल्लंघन करने र वालों पर अनुशासनिक कार्यवाही की जाएगी। किसी बच्चे के साथ जाति, धर्म, लिंग आधारित दुर्व्यवहार या भेदभाव भी नहीं किया जाएगा। इन आदेशों को सभी स्कूल सख्ती से पालन कराएंगे।

यह भी किया गया है प्रतिबंधित

बच्चों को परिसर में दौड़ाना, चपत लगाना, घुटनों के बल बैठाना, यौन शोषण, प्रताड़ना, कक्षा में अकेले बंद करना, बिजली का झटका देना, अपमानित करके नीचा दिखाने, शारीरिक व मानसिक रूप से अन्य आघात पहुंचाना।

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